आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कांग्रेस ने बुधवार को केंद्र सरकार पर किसानों के साथ वादाखिलाफी का आरोप लगाया और कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करनी चाहिए।
पार्टी के लोकसभा सदस्य अमरिंदर राजा वड़िंग ने सदन में वर्ष 2026-27 के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान की मांगों पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि किसान आंदोलन के बाद उम्मीद थी कि सरकार एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग पूरी करेगी, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।
उनका कहना था, ‘‘आज किसान सबसे ज्यादा असुरक्षित महसूस कर रहा है क्योंकि उसे इस बात का डर है कि वह लागत भी वसूल पाएगा या नहीं।’’
कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘देश के किसानों की मुख्य मांग एमएसपी की कानूनी गारंटी की है। किसान कोई अतिरिक्त चीज नहीं मांग रहा है।’’
वड़िंग ने कहा, ‘‘किसान आंदोलन में 750 किसानों की जान चली गई, लेकिन एमएसपी की गारंटी नहीं दी गई।’’
सांसद ने कहा कि जिन किसानों की मौत हुई है उनके परिजन को मुआवजा दिया जाना चाहिए।
उन्होंने पंजाब में बाढ़ की तबाही का उल्लेख करते हुए दावा किया कि राज्य के किसानों का कोई राहत नहीं मिली।
वड़िंग ने कहा कि केंद्र और पंजाब सरकार के बीच की लड़ाई का नुकसान किसानों को नहीं होना चाहिए।
समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश उत्तम पटेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के किसान अनिश्चितता की स्थिति से जूझ रहे हैं।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि किसानों का कर्ज माफ किया जाए और किसान निधि को बढ़ाकर 20 हजार रुपये वार्षिक किया जाए।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद प्रतिमा मंडल ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की राशि में कमी करना किस तरह से उचित है।
उन्होंने कहा कि इस सरकार ने राजनीतिक गुणा-भाग करने के बाद तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया था।
उन्होंने कहा कि इस सरकार को अपने आप को किसान हितैषी कहने का अधिकार नहीं है।