नई दिल्ली
पूर्व थलसेना प्रमुख MM Naravane की पुस्तक के कथित लीक मामले में जांच तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, Delhi Police Special Cell ने प्रकाशन संस्था Penguin India के अधिकारियों से लगातार दो दिनों तक कई घंटों पूछताछ की।
जांच एजेंसियां पांडुलिपि और उसके डिजिटल फाइल्स के प्रबंधन, संचरण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत जानकारी जुटा रही हैं। सूत्रों का कहना है कि आगे की जांच के लिए प्रकाशन संस्था के प्रतिनिधियों को फिर से तलब किया जा सकता है।
जांच की दो प्रमुख दिशाएं
सूत्रों के अनुसार, जांच दो अलग-अलग पहलुओं पर केंद्रित है।पहला पहलू उस पीडीएफ संस्करण से जुड़ा है, जो आधिकारिक रिलीज से पहले कथित रूप से सार्वजनिक हो गया। जांच के दौरान सामने आया कि उपलब्ध पीडीएफ फाइल में प्रिंटर का नाम दर्ज करने वाला कॉलम खाली था। इससे संदेह जताया जा रहा है कि फाइल प्रिंटिंग से पहले ही लीक हो सकती है।
पुलिस ने प्रकाशन संस्था से पूछा है कि पीडीएफ फाइल किन-किन चरणों से गुजरी, कितने लोगों को उस तक पहुंच थी, और क्या इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी माध्यम से साझा किया गया था। प्रकाशक ने संबंधित जानकारी एकत्र करने के लिए समय मांगा है, यह कहते हुए कि पुस्तक का प्रकाशन कार्य लगभग तीन वर्षों से चल रहा था।
दूसरा पहलू उस हार्ड कॉपी से जुड़ा है, जिसे संसद में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने प्रदर्शित किया था। साथ ही यह दावा भी किया गया कि पुस्तक विदेशों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध थी। विशेष सेल अब उस हार्ड कॉपी के स्रोत और उसके प्रसार की भी जांच कर रही है।
लापरवाही या साजिश?
सूत्रों के अनुसार, विशेष सेल प्रकाशन संस्था द्वारा दिए गए जवाबों का विश्लेषण कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित लीक पांडुलिपि के प्रबंधन में लापरवाही का परिणाम था या फिर इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है।
आधिकारिक तौर पर अभी तक कोई निष्कर्ष घोषित नहीं किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रकाशन प्रक्रिया की गोपनीयता से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील माना जा रहा है।




