Future wars will be won not just by AI, but by determination and soldiers: Rajnath Singh
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि भविष्य के युद्ध कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से लड़े जा सकते हैं, लेकिन उनमें जीत अब भी राष्ट्रीय संकल्प, प्रशिक्षित सैनिकों और मजबूत सैन्य शक्ति के दम पर ही हासिल होगी।
यहां आईएनएस ‘महेंद्रगिरि’ को नौसेना में शामिल किए जाने के समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने यह भी कहा कि आंध्र प्रदेश भारत के रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण के नए शक्ति केंद्र के रूप में उभरा है।
रक्षा आधुनिकीकरण के प्रति सरकार के संतुलित नजरिए पर जोर देते हुए सिंह ने कहा कि भारत अगली पीढ़ी की तकनीकों में निवेश कर रहा है और साथ ही पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को भी मजबूत कर रहा है।
उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पारंपरिक और आधुनिक क्षमताओं के प्रभावी एकीकरण के उदाहरण के तौर पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र किया।
उन्होंने कहा, ‘‘भविष्य के युद्ध कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से लड़े जा सकते हैं, लेकिन उनमें जीत राष्ट्रीय संकल्प, प्रशिक्षित सैनिकों और सक्षम सैन्य शक्ति से ही हासिल होगी। इसलिए मैं कहूंगा कि नयी प्रौद्योगिकियां और पारंपरिक रक्षा प्रणालियां एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं और एक-दूसरे को पूर्ण बनाते हैं। पारंपरिक प्रणालियों के बिना नयी प्रौद्योगिकियां अपने आप में अधूरी हैं।’’
सिंह ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि नयी प्रौद्योगिकियों ने युद्ध के स्वरूप को बदल दिया है, लेकिन उन्होंने युद्ध के पारंपरिक साधनों की भूमिका को कम नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि युद्ध के बुनियादी सिद्धांतों को पूरा करने के लिए आज भी मजबूत पारंपरिक सैन्य क्षमता जरूरी है और इसका महत्व पहले जितना ही बना हुआ है।
समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा के एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होने पर जोर देते हुए सिंह ने कहा कि व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाओं, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए समुद्र बेहद महत्वपूर्ण हैं।