प्लेग से हंटावायरस तक: समुद्री संक्रमणों का असर

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 18-05-2026
From plague to hantavirus: the impact of marine infections
From plague to hantavirus: the impact of marine infections

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
दुनिया के दूरदराज हिस्सों का भ्रमण करने के लिए क्रूज चलते-फिरते आरामदायक होटल की तरह माने जाते हैं। लेकिन एक महामारी विज्ञानी (एपिडेमियोलॉजिस्ट) के तौर पर मैं जानता हूं कि संक्रमण फैलाने वाले रोगाणुओं के लिए ये सबसे अनुकूल जगह भी हैं, जहां हजारों अजनबी लोग कई दिनों या हफ्तों तक बंद जगहों में साथ रहते हैं, एक ही भोजन कक्ष साझा करते हैं, लिफ्ट के बटन व रेलिंग जैसी बार-बार इस्तेमाल होने वाली सतहों को छूते हैं और एक बंद परिसर में मौजूद हवा में सांस लेते हैं।
 
जहाज जिस-जिस बंदरगाह पर रुकता है और यात्री कुछ समय के लिए वहां घूमने उतरते हैं, वहां रोगाणुओं को जहाज पर चढ़ने का मौका मिल जाता है। एक बार संक्रमण जहाज पर पहुंच जाए, तो उसे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने के लिए बेहद अनुकूल माहौल मिल जाता है।
 
अप्रैल 2026 में नीदरलैंड के ध्वज वाले जहाज ‘एमवी होंडियस’ पर ‘एंडीज’ हंटावायरस का प्रकोप सामने आने से यह पुरानी धारणा फिर सच साबित हुई। इस जहाज पर 23 देशों के 147 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे।
 
‘एंडीज’ संक्रमण, हंटावायरस के स्वरूपों में से एक है। यह एकमात्र ऐसा हंटावायरस है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह व्यक्ति से व्यक्ति में फैल सकता है, हालांकि इसकी संक्रमण क्षमता बहुत अधिक नहीं है। यह कोविड-19 या खसरे जितना संक्रामक नहीं है।
 
होंडियस जहाज पर 14 मई तक संक्रमण के कुल 11 मामले सामने आ चुके थे, जिनमें तीन लोगों की मौत हो गई।
 
समुद्र में संक्रमण फैलना जन स्वास्थ्य की सबसे पुरानी चुनौतियों में से एक रहा है। मध्यकालीन ‘प्लेग’ से लेकर आधुनिक दौर तक, इसने बार-बार दुनिया की रोग नियंत्रण क्षमता की परीक्षा ली है। यही नहीं, इसने आज मौजूद अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था को आकार देने में भी अहम भूमिका निभाई है।
 
हालांकि यह आपस में जुड़ी जनस्वास्थ्य व्यवस्था दुनियाभर के देशों के सहयोग पर निर्भर करती है।
 
 
बंदरगाहों में क्वारंटीन (पृथकवास) से वैश्विक रोग नियंत्रण तक