Fact Check: क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प मर चुके हैं, X पर ट्रेंड कर रहा #Trumpisdead

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 30-08-2025
Fact Check: Is US President Donald Trump Dead?
Fact Check: Is US President Donald Trump Dead?

 

ओनिका माहेश्वरी/नई दिल्ली

सोशल मीडिया पर #Trumpisdead या "ट्रम्प मर चुका है" और "ट्रम्प मर गया" जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं और इनसे जुड़े हजारों पोस्ट्स और एंगेजमेंट्स के बावजूद, ये अफवाहें पूरी तरह से निराधार हैं।

अफवाहों की शुरुआत कैसे हुई?

ऐसा प्रतीत होता है कि ये अफवाहें उस समय फैलने लगीं जब उपराष्ट्रपति जेडीवेंस ने एक सामान्य उत्तराधिकार संबंधी टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर ट्रम्प की मृत्यु हो जाती है तो वे "तैयार" हैं। इसे ऑनलाइन गलत तरीके से समझा गया। ट्रम्प की सार्वजनिक उपस्थिति में कमी, जो उनकी उम्र और कुछ हल्की स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हो सकती है, ने इन अटकलों को और बढ़ावा दिया।

व्हाइट हाउस और प्रतिष्ठित समाचार आउटलेट्स ने बार-बार यह पुष्टि की है कि ट्रम्प जीवित और स्वस्थ हैं।

एक वायरल दावे का खंडन किया गया जिसमें यह कहा गया था कि ट्रम्प के पास "बस कुछ ही दिन बचे हैं" और वे क्रॉनिक वेनस इनसफिशिएंसी (CVI) जैसी बीमारी से ग्रस्त हैं, जो एक सामान्य और प्रबंधनीय स्थिति है। उनके व्हाइट हाउस के चिकित्सक ने उनके स्वास्थ्य को स्थिर बताया है।

ट्रम्प के निधन से संबंधित किसी भी दावे का समर्थन करने वाला कोई विश्वसनीय प्रमाण या आधिकारिक घोषणा नहीं है।

भारत की अर्थव्यवस्था: ट्रम्प के बयानों के विपरीत

हाल के समय में, भारत की अर्थव्यवस्था ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि यह लचीली है और इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वित्तीय वर्ष 2026 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) में 7.8% बढ़ा है, जो पिछले पाँच तिमाहियों का सबसे उच्चतम स्तर है और यह अधिकांश पूर्वानुमानों से भी बेहतर है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही (7.4%) और इसी तिमाही में 6.7% की वृद्धि के बाद आया है।

यह वृद्धि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारतीय आयातों पर 50% टैरिफ लगाने के बाद आई है। ट्रम्प का यह कदम दंडात्मक था, क्योंकि भारत रूस के साथ तेल व्यापार जारी रखे हुए है। ट्रम्प ने हाल ही में भारत की अर्थव्यवस्था को "मृत" कहकर न केवल इसे गलत साबित किया है, बल्कि उनके बयानों में एक राजनीतिक गलतफहमी भी दिखाई देती है।

भारत की अर्थव्यवस्था और ट्रम्प के दृष्टिकोण का अंतर

ट्रम्प ने भारतीय आयातों पर 25% से 50% तक का टैरिफ बढ़ा दिया था, जिसका उद्देश्य भारत को रूस के साथ ऊर्जा व्यापार से हटाना था। हालांकि, यह कदम भारत की आर्थिक संरचना की गलत समझ और वैश्विक आर्थिक गतिशीलता की एक गलत व्याख्या को दिखाता है।

भारत एक निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था नहीं है जैसे चीन, जर्मनी, या दक्षिण कोरिया। भारत की जीडीपी का 60% हिस्सा घरेलू मांग से जुड़ा है, जिसमें घरेलू उपभोग, सेवाएँ और बुनियादी ढांचा शामिल हैं। इसका मतलब है कि भारत पर विदेशी व्यापार प्रतिबंधों का असर बहुत ज्यादा नहीं होगा।

अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का असर भारत की जीडीपी वृद्धि दर में 30-80 आधार अंकों की कमी ला सकता है, लेकिन फिर भी 7.8% की वृद्धि भारत के पास पर्याप्त गति देती है।

ट्रम्प के दृष्टिकोण में रणनीतिक चूक

ट्रम्प का दृष्टिकोण भारत के साथ एक साझेदारी की बजाय व्यापार संघर्ष को बढ़ावा देने की ओर है। भारत न केवल दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, बल्कि एशिया में चीनी प्रभाव को संतुलित करने के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार भी है।

ऐसे में, ट्रम्प द्वारा व्यापार दंड लगाने से न केवल आर्थिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं, बल्कि यह दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी नुकसान पहुँचाता है। भारत ने अपने इतिहास में गुटनिरपेक्ष नीति अपनाई है और दुनिया से अपनी शर्तों पर जुड़ने का विकल्प चुना है।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञ सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों को गंभीरता से ले रहे हैं और इसके खतरों के बारे में चेतावनी दे रहे हैं, खासकर राजनीतिक घटनाओं के दौरान।

डोनाल्ड ट्रम्प की मृत्यु से जुड़ी अफवाहें पूरी तरह से निराधार हैं। ये गलत सूचनाओं और गलत व्याख्याओं का परिणाम हैं।

ट्रम्प द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को लेकर उनकी नीति एक ग़लत कदम साबित हो सकती है, क्योंकि भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत है और उसे इस प्रकार के दबाव से कोई खास फर्क नहीं पड़ता।

भारत, एक मजबूत और आत्मविश्वासी नीति के तहत अपनी अर्थव्यवस्था को विकसित कर रहा है, और ट्रम्प प्रशासन को यह समझने की जरूरत है कि भारत जैसा साझेदार किसी सजा का नहीं, बल्कि सहयोग का हक़दार है।