ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश के महराजगंज ज़िले से एक मार्मिक घटना सामने आई है. नौतनवां क्षेत्र में एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद उनके छोटे-छोटे बच्चों को अंतिम संस्कार के लिए दर-दर भटकना पड़ा. मदद की गुहार लगाने के बावजूद जब कोई सहयोग नहीं मिला, तब स्थानीय मुस्लिम नागरिकों ने आगे बढ़कर शव का दाह संस्कार कराया.
जानकारी के अनुसार, मृतक 40 वर्षीय लवकुमार कई दिनों से बीमार थे और इलाज के बाद हाल ही में घर लौटे थे. पिछले सप्ताह उनकी तबीयत बिगड़ने पर उनका निधन हो गया। पत्नी की मौत पहले ही हो चुकी थी और बच्चे अपनी दादी के साथ अलग रहते थे. पिता की मृत्यु के बाद जब बच्चों ने मोहल्लेवालों और रिश्तेदारों से अंतिम संस्कार में मदद मांगी तो किसी ने हाथ नहीं बढ़ाया.
हताश बच्चे शव को लेकर पहले मानवाघाट पहुँचे, लेकिन वहां से उन्हें मुस्लिम कब्रिस्तान भेज दिया गया। कब्रिस्तान में भी उन्हें यह कहकर मना कर दिया गया कि मृतक हिंदू थे. इसके बाद बच्चे घंटों तक चौराहों पर मदद मांगते रहे। कई राहगीरों ने उनकी हालत देखी लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं आया.
आख़िरकार स्थानीय वार्ड सदस्य राशिद कुरैशी और उनके रिश्तेदार वारिस कुरैशी को जब घटना की जानकारी हुई, तो उन्होंने तुरंत लकड़ी का इंतज़ाम किया और देर रात तक श्मशान घाट में खड़े रहकर हिंदू रीति-रिवाज से लवकुमार का अंतिम संस्कार कराया. राशिद कुरैशी ने कहा, “धर्म से ऊपर इंसानियत है. जब बच्चे अकेले खड़े होकर पिता की लाश के साथ रो रहे हों, तब चुप रहना सबसे बड़ा अपराध है.”
घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया। नौतनवां के उपज़िलाधिकारी नवीन कुमार ने बच्चों से मुलाक़ात कर उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता दिलाई. साथ ही बच्चों को बाल सेवा योजना में शामिल करने की घोषणा की गई. प्रशासन ने आश्वासन दिया कि बैंक खाता खुलते ही प्रत्येक बच्चे को पाँच हज़ार रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जाएगी और उनकी शिक्षा की पूरी व्यवस्था की जाएगी.
अधिकारियों ने बताया कि मृतक लवकुमार नगर पंचायत क्षेत्र से बाहर अकेले रहते थे और उनकी खराब तबीयत के चलते रविवार को निधन हो गया था। घटना की जानकारी समय पर प्रशासन तक नहीं पहुँच सकी, इसी कारण मदद में देरी हुई.
इनपुट्स: बीबीसी