आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू आगामी राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय भारोत्तोलन दल की अगुआई करेंगी जहां डोपिंग मामलों से प्रभावित तैयारियों के बावजूद भारतीय टीम इस प्रतियोगिता में अपने दबदबे को कायम रखने के इरादे से उतरेगी।
प्रतियोगिता से पहले भारतीय भारोत्तोलन दल को बड़ा झटका लगा, जब डोपिंग उल्लंघनों के कारण खिलाड़ियों की संख्या 16 से घटाकर 11 कर दी गयी। इसमें नवीनतम मामला 96 किलोग्राम वर्ग के दिलबाग सिंह का है, जिन्हें इसी सप्ताह टीम से बाहर कर दिया गया। इससे भारतीय दल की तैयारियों पर असर पड़ा है।
इन बाधाओं के बावजूद राष्ट्रमंडल खेलों की भारोत्तोलन स्पर्धा में भारत अब भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है। इसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि चीन और उत्तर कोरिया जैसे इस खेल में मजबूत माने जाने वाले देश इस प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं हैं।
भारतीय भारोत्तोलकों ने 1990, 2002, 2018 और 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले देश का गौरव हासिल किया था। कुल 133 पदकों (46 स्वर्ण) के साथ भारत इस स्पर्धा के इतिहास में ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरा सबसे सफल देश है।
बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल 2022 में भारत ने भारोत्तोलन में तीन स्वर्ण और तीन रजत सहित कुल 10 पदक जीतकर पदक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त किया था। ऐसे में ग्लास्गो में भी टीम से एक और प्रभावशाली प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
भारतीय दल के सभी 11 खिलाड़ियों में पदक जीतने की क्षमता रखते हैं लेकिन स्वर्ण पदक की सबसे प्रबल उम्मीदें कुछ खिलाड़ियों से ही हैं।
इनमें सबसे बड़ा नाम मीराबाई चानू का है, जिनके अपने राष्ट्रमंडल खिताब का सफलतापूर्वक बचाव करने की पूरी संभावना है। पूर्व विश्व चैंपियन और ओलंपिक रजत पदक विजेता चानू का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ कुल भार 205 किलोग्राम (स्नैच 89 किग्रा और क्लीन एवं जर्क 116 किग्रा) है। यह महिला 48 किलोग्राम वर्ग में अन्य सभी प्रतिद्वंद्वियों से काफी बेहतर है।
एशियाई खेलों के शुरू होने में दो महीने से भी कम समय शेष होने के कारण चानू ने संकेत दिए हैं कि वह ग्लास्गो में अनावश्यक जोखिम नहीं उठाएंगी।