दिल्लीः मस्जिद के इमामों के वेतन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर

Story by  राकेश चौरासिया | Published by  [email protected] • 2 Months ago
दिल्लीः मस्जिद के इमामों के वेतन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर

आवाज-द वॉयस / नई दिल्ली

दिल्ली की मस्जिद के इमामों, मौलवियों और अन्य लोगों को वेतन का भुगतान करने के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है. याचिका के अनुसार आप के नेतृत्व वाली अरविंद केजरीवाल सरकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 27 का घोर उल्लंघन करते हुए दिल्ली वक्फ बोर्ड को इमामों, मौलवियों और मस्जिद के अन्य लोगों को वेतन के भुगतान के लिए करोड़ों रुपये का कथित भुगतान कर रही है. दूसरी ओर, दिल्ली भर के मंदिरों के पुजारी को कोई पारिश्रमिक नहीं दिया जाता है. याचिका में कहा गया है कि मंदिरों के पुजारियों को वेतन का भुगतान न करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है.

दलील में आगे कहा गया है कि भारत का संविधान केंद्र स्तर या राज्य स्तर पर सरकार के कामकाज को उनके विचारों और कार्यों में धर्मनिरपेक्ष रहने के लिए अनिवार्य करता है. 42वें संवैधानिक संशोधन, 1976 द्वारा प्रस्तावना में ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द को शामिल करने के साथ संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के बारे में अंतर्निहित विशेषता स्पष्ट हो गई.

भारत के संविधान के आगे अनुच्छेद 27 में कहा गया है कि ‘‘किसी भी व्यक्ति को करों का भुगतान करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा, जिसकी आय विशेष रूप से किसी विशेष धर्म या धार्मिक संप्रदाय के प्रचार या रखरखाव के लिए खर्चों के भुगतान में विनियोजित की जाती है.’’

विशिष्ट प्रावधान, दूसरे शब्दों में, धर्म की तर्ज पर सार्वजनिक धन के व्यय पर रोक लगाता है, याचिका को जोड़ा गया. हालांकि, दिल्ली की एनसीटी सरकार द्वारा धर्मनिरपेक्षता की उपरोक्त अवधारणा का उल्लंघन किया जा रहा है. याचिकाकर्ता गार्गी खन्ना और प्रेरणा सिंह ने दिल्ली के एनसीटी की सरकार को दिल्ली के मंदिरों के पुजारी को मासिक पारिश्रमिक का भुगतान करने या वैकल्पिक रूप से दिल्ली की एनसीटी सरकार को वक्फ बोर्ड को सरकारी धन से भुगतान करने से रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की है.