आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
दिल्ली उच्च न्यायालय सफदरजंग अस्पताल में जारी वांगचुक के इलाज में दखल देने से इनकार करने संबंधी एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देने वाली सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो की अपील पर सुनवाई करने के लिए सोमवार को सहमत हो गया।
आंग्मो की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने एकल न्यायाधीश के रविवार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष पेश करते हुए इसे तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।
इस पर उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा, ‘‘ठीक है। आज ही सुनवाई करते हैं।’’
सिब्बल ने दलील दी कि एकल न्यायाधीश ने पीठ के 16 जुलाई के उस आदेश की ‘‘गलत व्याख्या’’ की है, जिसमें प्राधिकारियों को वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सीय रूप से हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया गया था।
उन्होंने कहा कि पुलिस वांगचुक को जंतर-मंतर से ‘‘जबरन’’ ले गई और अब वह सफदरजंग अस्पताल से अपनी पसंद के अस्पताल में स्थानांतरित होना चाहते हैं।
सिब्बल ने कहा कि हर व्यक्ति अपनी पसंद का चिकित्सा उपचार पाने का हकदार है और ‘‘इस अधिकार को छीना नहीं जा सकता।’’
प्राधिकारियों की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अनुरोध किया कि क्या इस मामले पर अपराह्न साढ़े तीन बजे या फिर मंगलवार को सुनवाई की जा सकती है। इस पर पीठ ने कहा कि इस अपील पर अपराह्न ढाई बजे सुनवाई हो सकती है।
आंग्मो ने अपनी अपील में कहा है कि एकल न्यायाधीश का रविवार का आदेश बिना किसी गिरफ्तारी के ही वांगचुक को अवैध रूप से सफदरजंग अस्पताल में रहने के लिए बाध्य करता है और यह निर्देश देता है कि न तो वांगचुक व न ही उनकी पत्नी के पास उनके चिकित्सीय उपचार से संबंधित निर्णय लेने का अंतिम अधिकार है।
अपील में यह भी कहा गया है कि आदेश में ‘सूचित सहमति’ और किसी व्यक्ति के अपने उपचार को स्वीकार करने या उससे इनकार करने के मौलिक अधिकार पर विचार नहीं किया गया है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने रविवार को वांगचुक के सफदरजंग अस्पताल में जारी इलाज के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने कहा था कि इस स्तर पर वांगचुक को किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने संबंधी उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो की याचिका पर कोई अंतरिम आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है।