दिल्ली दंगा साजिश केस: शरजील इमाम की याचिका पर नोटिस

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 17-07-2026
Delhi High Court issues notice on Sharjeel Imam's bail plea against rejection in Delhi riots conspiracy case
Delhi High Court issues notice on Sharjeel Imam's bail plea against rejection in Delhi riots conspiracy case

 

नई दिल्ली 

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को शरजील इमाम की ज़मानत अपील पर नोटिस जारी किया। यह अपील UAPA (गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम) के तहत दर्ज 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी कथित बड़ी साज़िश के मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा उनकी रेगुलर ज़मानत अर्ज़ी खारिज करने के आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की डिवीज़न बेंच ने अभियोजन पक्ष से जवाब मांगा और मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त के लिए तय की।
 
इमाम की ओर से पेश वकील अहमद इब्राहिम ने तर्क दिया कि कड़कड़डूमा कोर्ट का 4 जुलाई का आदेश कानूनी खामियों से भरा है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी, 2026 के उस फैसले के बाद से हालात में अहम बदलाव आया है, जिसमें इमाम की पिछली ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी गई थी। अपील में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के छह महीने से ज़्यादा समय बीतने के बावजूद, पिछले सात महीनों से ट्रायल रुका हुआ है। इसमें बताया गया है कि आरोप तय करने पर बहस अभी भी चल रही है और कोई खास प्रगति नहीं हुई है, जबकि इमाम लगभग छह साल से हिरासत में हैं।
 
इमाम ने सुप्रीम कोर्ट के 22 मई, 2026 के उस आदेश का भी हवाला दिया है जिसमें सह-आरोपी तस्लीम अहमद को अंतरिम ज़मानत दी गई थी और UAPA की धारा 43D(5) की व्याख्या से जुड़े कानूनी मुद्दे को एक बड़ी बेंच को भेजा गया था। अपील के अनुसार, इस घटनाक्रम और ट्रायल में लंबी देरी के कारण हालात में अहम बदलाव आया है, जिससे उनकी ज़मानत अर्ज़ी पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है। अपील में यह भी तर्क दिया गया है कि ट्रायल कोर्ट इन बाद के कानूनी घटनाक्रमों पर ध्यान देने में नाकाम रहा और गलत तरीके से यह माना कि ज़मानत अर्ज़ी सुनवाई के लायक नहीं है, सिर्फ़ इसलिए कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश में बताई गई शर्तें पूरी नहीं हुई थीं।
 
4 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज समीर बाजपेयी ने शरजील इमाम और सह-आरोपी उमर खालिद की रेगुलर ज़मानत अर्ज़ियों को खारिज कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी, 2026 के आदेश से बंधा हुआ है। इस आदेश में आरोपियों को अपनी ज़मानत याचिकाएं दोबारा दाखिल करने की इजाज़त तभी दी गई थी, जब अभियोजन पक्ष (prosecution) द्वारा पेश किए गए सुरक्षित गवाहों (protected witnesses) से पूछताछ पूरी हो जाए या एक साल बीत जाए—इनमें से जो भी पहले हो।
 
यह मामला 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे की कथित बड़ी साज़िश से जुड़ा है। अभी यह मामला आरोप तय करने (arguments on charge) के चरण में है और आरोप अभी तय नहीं किए गए हैं।