Delhi HC judge recuses from PIL on viral court recording case involving Kejriwal, AAP leaders
नई दिल्ली
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस तेजस करिया ने बुधवार को एक याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इस याचिका में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कई अन्य लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी, क्योंकि उन पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो कथित तौर पर अपलोड करने का आरोप है। यह मामला, जो शुरू में चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस करिया की बेंच के सामने लिस्टेड था, अब बुधवार को एक दूसरी बेंच द्वारा सुना जाएगा।
वकील वैभव सिंह द्वारा जनहित याचिका (PIL) के रूप में दायर इस याचिका में 13 अप्रैल, 2026 को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने हुई कोर्ट की कार्यवाही की बिना अनुमति रिकॉर्डिंग और उसे फैलाने पर गंभीर चिंता जताई गई है। उस दिन केजरीवाल खुद कोर्ट में पेश हुए थे और उन्होंने अपनी उस याचिका पर बहस की थी, जिसमें CBI और ED द्वारा की जा रही दिल्ली शराब नीति जांच से जुड़े एक मामले में जज से खुद को अलग करने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता के अनुसार, लगभग 45 से 50 मिनट तक चली यह सुनवाई बिना अनुमति के रिकॉर्ड की गई थी और बाद में इसे X, Facebook, Instagram और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म पर फैला दिया गया। सिंह का तर्क है कि इन क्लिप्स को इस तरह से शेयर किया गया, जिससे उनका संदर्भ बिगड़ गया, गलत बातें फैलाई गईं और न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचा।
याचिका में विशेष रूप से कई राजनीतिक नेताओं के नाम लिए गए हैं, जिनमें दिग्विजय सिंह और सौरभ भारद्वाज शामिल हैं। इन पर कथित तौर पर रिकॉर्डिंग पोस्ट करने या उन्हें और आगे बढ़ाने का आरोप है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि केजरीवाल ने खुद कुछ क्लिप्स को रीपोस्ट किया, जिससे वे और ज़्यादा लोगों तक पहुंचीं। जिन अन्य लोगों का ज़िक्र किया गया है, उनमें पत्रकार रवीश कुमार और AAP नेता मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, संजीव झा, प्रदीप साहनी, जरनैल सिंह, मुकेश अहलावत और विनय मिश्रा शामिल हैं।
याचिका में यह तर्क दिया गया है कि ऐसे काम 'दिल्ली हाई कोर्ट के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम, 2021' और 'इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम, 2025' का उल्लंघन हैं। ये दोनों ही नियम कोर्ट की कार्यवाही की बिना अनुमति रिकॉर्डिंग या उसे शेयर करने पर साफ तौर पर रोक लगाते हैं।
इस घटना को "गंभीर और अपनी तरह की पहली घटना" बताते हुए, याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुज़ारिश की है कि वह सभी प्लेटफॉर्म से इन रिकॉर्डिंग को तुरंत हटाने का आदेश दे और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करे। अब इस मामले पर आगे की सुनवाई के लिए एक दूसरी बेंच विचार करेगी।