"दिल्ली HC ने जंतर मंतर बंगले याचिका पर कांग्रेस को नोटिस

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 14-05-2026
Delhi HC issues notice on Congress plea seeking sale deed for 7, Jantar Mantar Road bungalow
Delhi HC issues notice on Congress plea seeking sale deed for 7, Jantar Mantar Road bungalow

 

नई दिल्ली
 
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) की एक याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया। इस याचिका में 7, जंतर मंतर रोड, नई दिल्ली स्थित बंगले के लिए AICC के पक्ष में एक कन्वेयंस/सेल डीड (बिक्रीनामा) निष्पादित करने के निर्देश देने की मांग की गई है। हालांकि, जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने रिट याचिका की स्वीकार्यता (maintainability) को लेकर कुछ आपत्तियां जताईं और कहा कि कोर्ट कांग्रेस पार्टी की अंतरिम सुरक्षा की मांग पर तभी विचार करेगा, जब पार्टी कोर्ट को याचिका की स्वीकार्यता के मुद्दे पर संतुष्ट कर देगी।
 
AICC ने अपनी रिट याचिका में दावा किया है कि यह संपत्ति 1956 में इंडियन नेशनल कांग्रेस को आवंटित की गई थी और पार्टी ने 1959 में भारत सरकार को इसकी पूरी बिक्री राशि (sale consideration) का भुगतान कर दिया था। याचिका के अनुसार, पुनर्वास मंत्रालय ने 16 जनवरी, 1956 के एक पत्र के माध्यम से 7, जंतर मंतर रोड स्थित परिसर के एक हिस्से के आवंटन को मंजूरी दी थी, जिसके बाद 'इवैक्यूई प्रॉपर्टी के कस्टोडियन' (निष्क्रांत संपत्ति के अभिरक्षक) के कार्यालय ने कांग्रेस पार्टी से संपत्ति का कब्जा लेने को कहा था।
 
याचिका में कहा गया है कि AICC ने 21 मई, 1959 की चालान रसीदों के माध्यम से बिक्री राशि के तौर पर 6,10,700 रुपये का भुगतान किया था, जिसमें अतिरिक्त प्रीमियम और वार्षिक ग्राउंड रेंट भी शामिल था। कांग्रेस पार्टी ने अपने दावे को पुष्ट करने के लिए कुछ आंतरिक फाइल नोटिंग्स का भी हवाला दिया है, जिन्हें कथित तौर पर RTI एक्ट के तहत प्राप्त किया गया था। इन नोटिंग्स के आधार पर पार्टी ने तर्क दिया है कि दिल्ली सरकार के 'भूमि और भवन विभाग' के अधिकारियों ने उसके पक्ष में कन्veयंस डीड निष्पादित करने की सिफारिश की थी।
 
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 2014 के उस फैसले का भी जिक्र किया गया है, जो 'जनता दल पार्टी बनाम इंडियन नेशनल कांग्रेस और अन्य' मामले में आया था। याचिका में दावा किया गया है कि 1969 से पहले की कांग्रेस पार्टी की संपत्तियों पर अधिकार से जुड़ा मुद्दा, मौजूदा कांग्रेस पार्टी के पक्ष में पूरी तरह से सुलझाया जा चुका है। याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि 2017 से लेकर अब तक बार-बार अभ्यावेदन (representations) दिए जाने के बावजूद, अधिकारियों ने न तो कन्वेयंस डीड निष्पादित की है और न ही पार्टी को इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय सूचित किया है।