नई दिल्ली,
दिल्ली हाई कोर्ट ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) के पूर्व डायरेक्टर पुनीत नरेंद्र गर्ग की जमानत याचिका पर मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जवाब मांगा। गर्ग कथित तौर पर ₹40,000 करोड़ से अधिक के बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी हैं।
जस्टिस प्रतीक जालान की अदालत ने गर्ग और ED के वकीलों की शुरुआती दलीलें सुनने के बाद जांच एजेंसी को नोटिस जारी किया। ED की ओर से विशेष वकील जोहेब हुसैन और प्रांजल त्रिपाठी पेश हुए।
ED ने गर्ग को 29 जनवरी 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने ED की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
15 जून को राउज एवेन्यू कोर्ट ने ED द्वारा पुनीत गर्ग और अन्य आरोपियों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। अदालत ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी। इससे पहले अप्रैल में मेडिकल आधार पर मांगी गई अंतरिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई थी।
गर्ग ने निजी अस्पताल में मेडिकल जांच और इलाज के लिए अंतरिम जमानत मांगी थी। गिरफ्तारी से पहले उनका इलाज मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में चल रहा था। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें गंभीर जांच और कैप्सूल एंडोस्कोपी कराने की सलाह दी गई है।
हालांकि, विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने AIIMS मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि फिलहाल आरोपी को निजी अस्पताल में जांच की जरूरत नहीं है और आवश्यकता पड़ने पर सरकारी अस्पताल में इलाज कराया जा सकता है।
गर्ग की ओर से अदालत में कहा गया कि वह 61 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक हैं और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं। इनमें क्रोहन कोलाइटिस, रीढ़ की हड्डी का गंभीर ऑस्टियोपोरोसिस, ऑस्टियोपेनिया, हाई ब्लड प्रेशर, प्रोस्टेट की समस्या, गठिया और एडजस्टमेंट डिसऑर्डर शामिल हैं।
उनके वकील ने दलील दी कि जेल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं उनकी जटिल स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए पर्याप्त नहीं हैं और उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल की जरूरत है।
ED के अनुसार, यह मामला RCOM और उसकी समूह कंपनियों से जुड़े कथित बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित है। जांच एजेंसी ने CBI की 21 अगस्त 2025 को दर्ज FIR के आधार पर ECIR दर्ज की थी।
ED का आरोप है कि पुनीत गर्ग ने RCOM में वरिष्ठ पदों पर रहते हुए कथित अपराध से अर्जित धन को हासिल करने, छिपाने, अलग-अलग स्तरों पर ट्रांसफर करने और इस्तेमाल करने में भूमिका निभाई।
जांच एजेंसी के मुताबिक, गर्ग 2006 से 2013 तक RCOM में ग्लोबल एंटरप्राइज बिजनेस के अध्यक्ष रहे। इसके बाद 2014 से 2017 तक उन्होंने रेगुलेटरी अफेयर्स के अध्यक्ष के रूप में काम किया। अक्टूबर 2017 में उन्हें कंपनी का एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनाया गया। अप्रैल 2019 से अप्रैल 2025 तक वे नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रहे।
ED ने आरोप लगाया कि कथित अपराध से प्राप्त धन को RCOM की विदेशी सहायक कंपनियों और ऑफशोर संस्थाओं के जरिए डायवर्ट किया गया। एजेंसी का दावा है कि इस धन का एक हिस्सा अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित मैनहट्टन में लग्जरी कोंडोमिनियम खरीदने में इस्तेमाल किया गया।
ED के अनुसार, RCOM की कॉरपोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के दौरान इस संपत्ति को कथित रूप से बेचा गया और बिक्री से मिले 8.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर को एक संदिग्ध निवेश व्यवस्था के जरिए अमेरिका से भेजा गया।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि बैंक ऋण से प्राप्त सार्वजनिक धन का कुछ हिस्सा कथित तौर पर गर्ग के निजी खर्चों, जिसमें उनके बच्चों की विदेश शिक्षा से जुड़े भुगतान भी शामिल हैं, के लिए इस्तेमाल किया गया।
मामले में ED की जांच जारी है।