Court approval not required for rape victim to terminate pregnancy up to 24 weeks: High Court
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने वर्ष 2025 के अपने एक आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि अगर कोई दुष्कर्म पीड़ित महिला 24 सप्ताह तक का गर्भ समाप्त करना चाहती है, तो इसके लिए उसे अदालत की मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं है।
इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट ने 16 साल की दुष्कर्म पीड़ित लड़की के पिता की ओर से दायर रिट याचिका 11 अगस्त (मंगलवार) को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
याचिका में नाबालिग लड़की ने अपने करीब 18 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति मांगी थी।
एकल पीठ ने उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के 20 फरवरी 2025 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि यौन हमले, बलात्कार या अनाचार की पीड़िताओं के जिन मामलों में गर्भावस्था 24 हफ्ते तक की है, उनमें गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम 1971 के संबद्ध प्रावधानों की रोशनी में न्यायिक कार्यवाही की जरूरत नहीं है।
अदालत ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त को खंडपीठ के पारित इस आदेश को सभी संबंधित अस्पतालों, विशेषकर शासकीय चिकित्सालयों तक पहुंचाने का निर्देश दिया ताकि वे भविष्य में भी ऐसी स्थिति का ध्यान रख सकें।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आशीष चौबे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि 16 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता ने अपने पिता के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके अनचाहे गर्भ को कानूनी रूप से समाप्त करने के लिए उचित निर्देश देने की गुहार की थी।
उन्होंने बताया कि नाबालिग लड़की दुष्कर्म के कारण ठहरे गर्भ को जारी नहीं रखना चाहती क्योंकि वह इसके कारण बेहद मानसिक पीड़ा महसूस कर रही है।