आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी अमिताभ ठाकुर से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को छह महीने के भीतर उनके खिलाफ लंबित सभी चार अनुशासनात्मक मामलों में कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया।
वर्ष 1992 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी ठाकुर को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 23 मार्च, 2021 को संबंधित नियमों के तहत अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया था। यह कदम कई विभागीय जांचों और अनुशासनात्मक शिकायतों के बाद जनहित में उन्हें ‘सेवा में बने रहने के लिए अयोग्य’ पाए जाने के आधार पर उठाया गया था।
हालांकि, ठाकुर सामान्य परिस्थितियों में 2028 में सेवानिवृत्त होते।
न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की आंशिक कार्यदिवस पीठ (पीडब्ल्यूडी) ने राज्य सरकार की ओर से पेश वकील रुचिरा गोयल की दलीलों पर संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया था कि ठाकुर के खिलाफ चार अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित हैं।
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने सुनवाई के दौरान आरोप लगाया कि कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के बावजूद पिछले 10 सालों से यह प्रक्रिया खिंचती जा रही है और नतीजतन, 10 लाख रुपये के ग्रेच्युटी फंड सहित सेवानिवृत्ति से जुड़े उनके बकाया पैसों का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है।
उन्होंने पीठ से अनुरोध किया कि अधिकारियों को अनुशासनात्मक कार्यवाही तीन महीने में पूरी करने का निर्देश दिया जाए। पीठ ने हालांकि, केंद्र और राज्य सरकार से कार्यवाही छह महीने में पूरी करने का निर्देश दिया।
ठाकुर का कार्यकाल एक के बाद एक कई राज्य सरकारों के साथ लंबे समय तक चले टकराव के लिए जाना जाता है।