बासित जरगर/श्रीनगर
श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर स्थित घंटाघर और सोनवार में संयुक्त राष्ट्र संघ यानी यूएनओ के दफ्तर के बाहर गुरुवार को एक बड़ा और भावुक प्रदर्शन देखने को मिला। यह विरोध प्रदर्शन एसोसिएशन ऑफ टेरर विक्टिम्स कश्मीर यानी एटीवीके के बैनर तले आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन की अगुवाई संगठन की चेयरपर्सन तस्लीमा अख्तर कर रही थीं।
प्रदर्शन में शामिल लोग पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर यानी पीओजेके में मारे गए बेगुनाह नागरिकों के लिए इंसाफ की गुहार लगा रहे थे। वहां हाल के दिनों में भड़की हिंसा और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई स्थानीय लोगों की जान चली गई है। इसी के विरोध में कश्मीर के इस हिस्से में भी अब गुस्से की लहर साफ़ देखी जा रही है।

लाल चौक पर जुटे प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में आम नागरिकों पर बल प्रयोग की कड़ी निंदा की। विशेष रूप से रावलकोट और मुज़फ़्फ़राबाद जैसे क्षेत्रों से आ रही मौतों की खबरों पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की गई।
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं और युवाओं के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर इंसाफ और मानवाधिकारों की रक्षा के नारे लिखे हुए थे। लोग लगातार नारेबाजी कर रहे थे और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील कर रहे थे कि वे पीओजेके के बदतर होते जा रहे हालातों पर अपनी चुप्पी तोड़ें। वहां की जनता पर हो रहे अत्याचारों के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
After incidents of firing by forces on peaceful, unarmed civilians in POJK and resulting fatalities, reportedly women and children have also taken to the streets. pic.twitter.com/9iWVHvvzia
— Manu Khajuria (@KhajuriaManu) June 11, 2026
प्रदर्शन में शामिल श्रीनगर के एक स्थानीय नागरिक ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बहुत ही गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वहां पर बेगुनाह मुसलमानों का कत्लेआम किया जा रहा है जिसकी जितनी भी निंदा की जाए वो कम है।
आज पूरे कश्मीर के लोगों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि सरहद के उस पार अपनों को बेरहमी से मारा जा रहा है। कुछ परिवार तो ऐसे हैं जहां तीन से चार लोगों की लाशें उठी हैं। उन गरीब लोगों का आखिर कसूर क्या था। वे लोग सिर्फ बेतहाशा बढ़ती महंगाई, आटे और बिजली के संकट के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठा रहे थे। क्या अपने हक के लिए बोलना इतना बड़ा गुनाह है कि उन्हें सीधे गोलियों से भून दिया जाए।

विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और ज़मीनी सूत्रों से जो खबरें छनकर आ रही हैं वे बेहद खौफनाक हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सुरक्षा बलों और आम जनता के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक 30से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
इसके अलावा लगभग 200से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। यह पूरा बवाल तब और बढ़ गया जब पाकिस्तानी प्रशासन ने ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी जेएएसी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया। जेएएसी वहां का एक बेहद प्रमुख नागरिक समाज गठबंधन है जो लंबे समय से इलाके में आर्थिक बदहाली, राजनीतिक अधिकारों की कमी और क्षेत्रीय शिकायतों को लेकर जन आंदोलनों का नेतृत्व कर रहा है।
प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बात करते हुए एटीवीके की चेयरपर्सन तस्लीमा अख्तर ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर बेहद संगीन आरोप लगाए। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि पाकिस्तानी फौज और वहां के रेंजर जानबूझकर निहत्थे नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।
तस्लीमा अख्तर ने भावुक होते हुए कहा कि हम आज जम्मू कश्मीर के उन मासूम और बेगुनाह भाई-बहनों के लिए सड़क पर उतरे हैं जिनका पाकिस्तान ने पीओजेके के रावलकोट और अन्य हिस्सों में बेरहमी से नरसंहार किया है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना ने किसी को नहीं बख्शा। चाहे छोटे बच्चे हों, नौजवान हों, हमारी माताएं-बहनें हों या फिर बुजुर्ग हों, हर किसी पर जुल्म ढहाया गया।
तस्लीमा अख्तर ने ज़मीनी हकीकत का हवाला देते हुए बताया कि पाकिस्तानी रेंजर्स ने निहत्थे और लाचार लोगों पर छतों से सीधे अंधाधुंध गोलियां चलाईं। लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया गया। प्रदर्शन में शामिल सभी लोगों ने एक सुर में मांग की कि पीओजेके में हुई इन मौतों की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच होनी चाहिए।
पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द न्याय मिलना चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों से गुहार लगाई कि वे तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करें और जमीनी स्तर पर जाकर वहां के हालातों का मुआयना करें। श्रीनगर के केंद्र में हुआ यह पूरा प्रदर्शन सुरक्षा के कड़े इंतजामों और भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
यह विरोध प्रदर्शन इस मायने में बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि कश्मीर के लोग सरहद के उस पार रहने वाले अपने भाई-बहनों के दर्द को कितनी गहराई से महसूस कर रहे हैं। लंबे समय से जो प्रोपेगैंडा फैलाया जा रहा था उसकी कलई अब खुद वहां के नागरिक खोल रहे हैं।

जब आर्थिक संकट और बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसती जनता सड़कों पर उतरी तो उन्हें दबाने के लिए सेना का सहारा लिया गया। इसी वजह से घाटी के लोगों में भी पाकिस्तान के दोहरे रवैये को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जो देश मानवाधिकारों का ढिंढोरा पीटता है वह अपने ही कब्जे वाले इलाके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसा रहा है।
इस पूरे मामले ने अब एक बड़ा कूटनीतिक और मानवीय रूप ले लिया है। श्रीनगर से उठी यह आवाज़ सीधे तौर पर वैश्विक ताकतों को यह संदेश देती है कि वे अब इस गंभीर संकट की अनदेखी नहीं कर सकतीं। बेगुनाह नागरिकों की जान की कीमत पर खेली जा रही यह भू-राजनीतिक बिसात बंद होनी चाहिए। पीड़ित परिवारों को मुआवजा और सुरक्षा मिलनी चाहिए।
#WATCH | Thousands of protestors from various parts of Pakistan-occupied Jammu and Kashmir (PoJK) gathered in Rawalakot and raised slogans against what they described as Pakistan’s continued occupation and policies in the region. The demonstrators demanded justice for civilians… pic.twitter.com/zzuVYdLQNM
— ANI (@ANI) June 10, 2026
आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने के आसार हैं क्योंकि लोग अब चुप बैठने के मूड में नहीं हैं। वे हर स्तर पर इस दमन के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करते रहेंगे जब तक कि सरहद पार रहने वाले नागरिकों को उनके बुनियादी अधिकार और इंसाफ नहीं मिल जाता।