Companies need to overhaul cybersecurity as AI accelerates vulnerability attacks: Report
नई दिल्ली
मैकिन्से (McKinsey) की एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों को अपनी साइबर सुरक्षा रणनीतियों में आमूल-चूल बदलाव करने की आवश्यकता होगी। उन्हें 'ऑटोमेटेड थ्रेट डिटेक्शन' (स्वचालित खतरा पहचान) और 'वल्नेरेबिलिटी मैनेजमेंट' (कमजोरियों का प्रबंधन) में निवेश बढ़ाना होगा, क्योंकि अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से साइबर हमलावरों के लिए सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का पता लगाना और उनका फायदा उठाना आसान हो गया है।
फर्म ने चेतावनी दी है कि किसी कमजोरी (vulnerability) के सामने आने और उसके जरिए हमला होने के बीच का समय कम होता जा रहा है। अगर संगठन लगातार सुरक्षा निगरानी (continuous security monitoring), तेजी से सुधार (remediation) और AI-आधारित प्रणालियों पर मजबूत नियंत्रण नहीं अपनाते हैं, तो उनके लिए खतरा और बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है, "हमलावर अब और तेजी से काम कर रहे हैं। किसी गंभीर कमजोरी के सामने आने और उसके जरिए हमला होने के बीच का समय अब केवल कुछ घंटों का रह गया है, जबकि एक साल पहले तक इसमें कुछ हफ्तों का समय लगता था।"
मैकिन्से ने बताया कि 2026 तक, लगभग दो-तिहाई कमजोरियों का फायदा उनके सामने आने वाले दिन या उससे पहले ही उठा लिया गया था। इसके विपरीत, वेराइजन (Verizon) की '2026 डेटा ब्रीच इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट' के विश्लेषण के अनुसार, संगठनों को इन कमजोरियों को पूरी तरह से ठीक करने में लगने वाला औसत समय 32 दिन से बढ़कर 43 दिन हो गया है, और केवल 26 प्रतिशत कमजोरियों को ही पूरी तरह से ठीक किया जा सका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पारंपरिक साइबर सुरक्षा तरीके अब नाकाफी साबित हो रहे हैं, क्योंकि उन्नत AI मॉडल बहुत ही तेज गति और बड़े पैमाने पर सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का पता लगा सकते हैं।
इसमें एंथ्रोपिक (Anthropic) के 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' (Project Glasswing) के निष्कर्षों का हवाला दिया गया है। इसके भागीदारों ने 'क्लाउड माइथोस प्रिव्यू' (Claude Mythos Preview) का उपयोग करके 10,000 से अधिक गंभीर (high- or critical-severity) कमजोरियों का पता लगाया। कुछ भागीदारों ने तो यह भी बताया कि उनके बग (bug) खोजने की दर में दस गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। मैकिन्से का कहना है कि संगठनों को केवल अतिरिक्त सुरक्षा कर्मचारी रखने या पैचिंग (सुधार) के प्रयासों को बढ़ाने पर निर्भर रहने के बजाय, चार क्षेत्रों को एक साथ मजबूत करना होगा: साइबर सुरक्षा के तरीके, ऑपरेटिंग मॉडल, जोखिम और नियंत्रण ढांचे, तथा तकनीक।
रिपोर्ट में कहा गया है, "केवल गति ही काफी नहीं है।" इसमें एक ऐसे एकीकृत सुरक्षा कार्यक्रम की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, जो स्वचालित रूप से खतरों का पता लगाने, उन्हें प्राथमिकता देने और रोकने (containment) के साथ-साथ मानवीय निगरानी को भी शामिल करता हो।
इसमें यह भी सुझाव दिया गया है कि कंपनियों को सॉफ्टवेयर की कमजोरियों के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय करनी चाहिए, पहचान और पहुंच नियंत्रण (identity and access controls) को मजबूत करना चाहिए, थर्ड-पार्टी आपूर्तिकर्ताओं की नियमित निगरानी करनी चाहिए और सुरक्षित विकास (secure development) के तरीकों को अपनाना चाहिए। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि संगठन शुरुआती 90 दिनों की अवधि में नए सुरक्षा ढांचे को लागू करना शुरू करें। इसकी शुरुआत महत्वपूर्ण प्रणालियों से की जानी चाहिए और मापने योग्य सुधारों के आधार पर इसका विस्तार किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है, "ऐसे समय में जब कमियां सामने आ रही हैं और जोखिमों का इस्तेमाल अभूतपूर्व स्तर पर एक हथियार के रूप में किया जा रहा है, इस तरह की डिजिटल मजबूती (डिजिटल रेजिलिएंस) लंबे समय में एक प्रतिस्पर्धी लाभ साबित हो सकती है।"