communication technology to prevent road accidents through 'mutual communication' between vehicles
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए वाहन-से-वाहन (वी2वी) संचार प्रणाली को चरणबद्ध ढंग से लागू करने का प्रस्ताव रखा है।
यह उन्नत प्रौद्योगिकी वाहनों के बीच सीधा संवाद स्थापित करती है, जिससे संभावित खतरों की समय रहते जानकारी मिल सके और दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
मंत्रालय की मसौदा अधिसूचना के मुताबिक, वी2वी प्रणाली के तहत आसपास चल रहे वाहन आपस में वास्तविक-समय में जानकारी साझा करेंगे। इसमें वाहन की गति, स्थिति, दिशा और ब्रेक लगाने या गति बढ़ाने जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। इन आंकड़ों के आधार पर वाहन या चालक को संभावित खतरे के बारे में पहले ही चेतावनी मिल सकेगी।
उदाहरण के तौर पर, यदि आगे चल रहा वाहन अचानक ब्रेक लगाता है या किसी वाहन के साथ टक्कर का खतरा बनता है, तो पीछे आ रहे वाहन को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा। इसी तरह, असुरक्षित ढंग से लेन बदलने, ड्राइवर को नजर न आने वाले ब्लाइंड स्पॉट या एंबुलेंस/फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों के पास आने पर भी यह प्रणाली समय रहते सावधान कर सकती है।
मंत्रालय का मानना है कि इस तरह की 'कनेक्टेड वाहन' प्रौद्योगिकी से मानवीय त्रुटियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। यह प्रौद्योगिकी भविष्य में ऑटोमैटिक ब्रेकिंग और एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडास) जैसी सुविधाओं के साथ मिलकर और अधिक प्रभावी हो सकती है।
मसौदे में वी2वी और अन्य बुद्धिमान परिवहन प्रणाली (आईटीएस) के लिए 5.875 गीगाहर्ट्ज से 5.925 गीगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी बैंड के उपयोग का प्रस्ताव किया गया है। दूरसंचार विभाग पहले ही इस बैंड के इस्तेमाल को लाइसेंस की जरूरत से छूट दे चुका है, जिससे इस प्रौद्योगिकी को लागू करना आसान होगा।