आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
मनुष्य सहयोग पर निर्भर रहते हैं—चाहे भोजन उगाने की बात हो या बच्चों को पालने की। लेकिन प्रभावी सहयोग तभी संभव है जब दो लोग एक ही तरह से जानकारी को समझें, समान नियमों का पालन करें और एक साझा दृष्टिकोण विकसित करें। इसी सिद्धांत की वैज्ञानिक पुष्टि एक नए अध्ययन में हुई है, जिसमें पाया गया कि जब दो लोग किसी साझा कार्य पर साथ काम करते हैं, तो उनके दिमाग जानकारी को बहुत हद तक एक जैसी प्रक्रिया में बदलते हैं।
यह अध्ययन ओपन-एक्सेस जर्नल PLOS Biology में प्रकाशित हुआ है और इसे ऑस्ट्रेलिया की वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता डेनिस मोरेल और उनकी टीम ने संचालित किया। अध्ययन के दौरान 24 जोड़ों को शामिल किया गया, जिन्हें विभिन्न आकृतियों और पैटर्न को वर्गीकृत करने का कार्य सौंपा गया। हर जोड़ी को पहले से यह तय करने की स्वतंत्रता दी गई कि वे किस आधार पर पैटर्न को पहचानेंगे—लहरदार या सीधी रेखाएँ, मोटाई-पतलापन, कंट्रास्ट या आकार।
इसके बाद प्रतिभागियों को पीठ-से-पीठ लगाकर बैठाया गया और उन्हें लगातार दिखाई देने वाली आकृतियों को मिलकर वर्गीकृत करना था। इस दौरान इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (EEG) के माध्यम से उनके दिमागी गतिविधियों को रिकॉर्ड किया गया ताकि यह समझा जा सके कि किस हद तक दोनों के मानसिक प्रक्रियाएँ एक-दूसरे से मेल खाती हैं।
शोध में पाया गया कि आकृति दिखने के शुरुआती 45–180 मिलीसेकंड के भीतर सभी प्रतिभागियों की न्यूरल गतिविधियाँ समान थीं, क्योंकि वे एक ही पैटर्न को देख रहे थे। लेकिन 200 मिलीसेकंड के बाद, जब हर जोड़ी अपने तय किए गए नियमों के आधार पर आकृतियों को वर्गीकृत करने लगी, तो दिमागी गतिविधियाँ केवल उन्हीं जोड़ों में एक जैसी दिखीं जो सक्रिय रूप से साथ काम कर रहे थे। प्रयोग के आगे बढ़ने के साथ यह समानता और अधिक मजबूत होती गई, जो यह दर्शाती है कि सहयोग में सोचने और समझने के तरीके भी धीरे-धीरे एक जैसे होने लगते हैं।