अर्सला खान/ नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सोशल मीडिया पर लाखों लोगों के दिल जीत लिए हैं। तालाब में डूबती एक कार, उसके भीतर फंसा युवक, और किनारे खड़े लोग—जो सिर्फ दृश्य को तमाशे की तरह देख रहे थे। लेकिन इसी भीड़ के बीच एक शख़्स ने न केवल आगे बढ़ने का साहस दिखाया बल्कि इंसानियत का वह परिचय दिया जिसे आज पूरा देश सलाम कर रहा है।
इस शख़्स का नाम है फ़ैसल, जो तालाब के पास अपनी नाव से मछली पकड़ने का काम करता था। हादसे के दौरान उसकी खुद की नाव पलटकर डूब गई, लेकिन उसके हौसले और जज़्बे में कोई कमी नहीं आई। उसने पानी में छलांग लगाई और कार में फंसे युवक शुभम को सही समय पर बाहर निकालकर उसकी जान बचा ली। दरअसल, ये वीडियो यूपी के पीलीभीत का है जहां गौहनिया तालाब में डूबी कार, दो युवकों ने जान पर खेलकर ड्राइवर को निकला.
घटना के मुताबिक, शुभम अपनी कार से गांव की ओर लौट रहा था, तभी अचानक वाहन का नियंत्रण बिगड़ गया और कार सीधे तालाब में जा गिरी। कार कुछ ही मिनटों में पानी में डूबने लगी। आसपास मौजूद लोग यह दृश्य देखते रहे, लेकिन किसी में भी इतना साहस नहीं था कि वह पानी में उतरकर उसकी मदद कर सके।
लोग केवल अपने मोबाइल कैमरों में यह दृश्य कैद करने में लगे थे, जैसे यह कोई सामान्य घटना हो। लेकिन फ़ैसल ने यह सब देखा और एक पल भी गंवाए बिना तालाब में कूद पड़ा। तेज़ धारा के बीच उसने कार तक पहुंच कर दरवाज़ा खोलने की कोशिश की, लेकिन वह पूरी तरह बंद था। फ़ैसल ने खिड़की तोड़ी और अंदर फंसे शुभम को बाहर खींचकर सतह तक पहुंचाया।
इस दौरान फ़ैसल की अपनी जान पर भी खतरा बना रहा। पानी में उसकी नाव डूब चुकी थी, कार का दबाव बेहद तेज़ था और तालाब का तल काफी फिसलन भरा था। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। जैसे ही दोनों सुरक्षित बाहर आए, वहां खड़े लोग अचानक मदद के लिए दौड़ पड़े। शुभम को ग्रामीणों ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि कुछ ही मिनट की देरी उसकी जान ले सकती थी।
सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद लोग फ़ैसल के साहस और मानवता की खुलकर प्रशंसा कर रहे हैं। जहां कुछ लोग भीड़ की संवेदनहीनता पर दुख जता रहे हैं, वहीं अधिकतर लोग फ़ैसल को हिंदू-मुस्लिम से ऊपर उठकर इंसानियत की मिसाल कह रहे हैं। कई यूज़र्स ने लिखा कि ऐसे लोग ही समाज की असली ताकत हैं, जो बिना किसी भेदभाव के दूसरों की मदद के लिए आगे आते हैं।
स्थानीय प्रशासन ने भी फ़ैसल की बहादुरी की सराहना की है और उसे सम्मानित करने की तैयारी की जा रही है। शुभम के परिवार ने तो फ़ैसल को ‘भगवान का रूप’ बताते हुए कहा कि अगर वह समय पर न पहुंचता, तो उनका बेटा आज जीवित न होता। यह घटना सिर्फ एक बचाव की कहानी नहीं है, बल्कि यह याद दिलाती है कि इंसानियत अभी भी जिंदा है।
जब बाकी लोग तमाशबीन बनकर खड़े थे, तब फ़ैसल ने वह किया जो एक सच्चा इंसान ही कर सकता है—किसी की जान बचाना। पीलीभीत की यह कहानी आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई है कि वक्त पड़ने पर एक व्यक्ति भी बड़ा बदलाव ला सकता है।