कॉकरोच जनता पार्टी ने इंस्टाग्राम पर BJP को पछाड़ा, 5 दिनों में 1 करोड़ फॉलोअर्स का आंकड़ा पार किया

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 21-05-2026
Cockroach Janta Party beats BJP on Instagram, crosses 10 million followers in 5 days
Cockroach Janta Party beats BJP on Instagram, crosses 10 million followers in 5 days

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

भारत की राजनीति में सोशल मीडिया का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में जो हुआ उसने देश के डिजिटल राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह हिला दिया। एक ऐसा आंदोलन, जिसकी शुरुआत केवल व्यंग्य, गुस्से और मीम संस्कृति से हुई थी, उसने कुछ ही दिनों में देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों को ऑनलाइन लोकप्रियता के मामले में चुनौती दे दी। “कॉकरोच जनता पार्टी” यानी CJP नाम का यह व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन अब केवल एक मीम पेज नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं के असंतोष, बेरोज़गारी, राजनीतिक निराशा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बढ़ती बेचैनी का प्रतीक बन चुका है।

महज़ पाँच दिनों के भीतर CJP ने Instagram पर 1 करोड़ यानी 10 मिलियन फ़ॉलोअर्स का आँकड़ा पार कर लिया। यह उपलब्धि इसलिए भी चौंकाने वाली मानी जा रही है क्योंकि इसने ऑनलाइन लोकप्रियता के मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को पीछे छोड़ दिया। BJP के आधिकारिक Instagram अकाउंट @bjp4india पर वर्तमान में लगभग 87 लाख फ़ॉलोअर्स हैं, जबकि कांग्रेस का आधिकारिक अकाउंट @incindia लगभग 1.32 करोड़ फ़ॉलोअर्स के साथ अब भी आगे बना हुआ है। वहीं, 2012 में अस्तित्व में आई आम आदमी पार्टी (AAP) के Instagram पर लगभग 19 लाख फ़ॉलोअर्स हैं।

CJP का Instagram अकाउंट @cockroachjantaparty नाम से संचालित हो रहा है और गुरुवार को इसने 1 करोड़ फ़ॉलोअर्स का आँकड़ा पार कर लिया। सोशल मीडिया के इतिहास में किसी राजनीतिक या राजनीतिक-व्यंग्य आधारित अकाउंट की इतनी तेज़ी से हुई वृद्धि को अभूतपूर्व माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस अकाउंट पर अब तक केवल 56 पोस्ट किए गए हैं, जबकि BJP के आधिकारिक अकाउंट पर वर्षों में 18 हज़ार से अधिक पोस्ट प्रकाशित हो चुके हैं। इसके बावजूद CJP ने बेहद कम समय में BJP को पीछे छोड़ दिया।

6 million followers and counting: Can Cockroach Janta Party dethrone BJP on  Instagram? - BusinessToday

यह पूरा विवाद 15 मई को शुरू हुआ, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान कुछ युवाओं और सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं पर टिप्पणी की। अदालत में एक वकील के सोशल मीडिया व्यवहार का उल्लेख करते हुए CJI ने कहा था, “कुछ युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें न तो कोई रोज़गार मिलता है और न ही इस पेशे में उनकी कोई जगह होती है। उनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया पर सक्रिय हो जाते हैं, कुछ RTI कार्यकर्ता बन जाते हैं, और कुछ अन्य तरह के कार्यकर्ता बन जाते हैं; और फिर वे हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।”

यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई। बड़ी संख्या में युवाओं ने इसे अपमानजनक बताया और कहा कि देश के सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख द्वारा युवाओं की तुलना “कॉकरोच” और “परजीवियों” से करना बेहद आपत्तिजनक है। इसी गुस्से और व्यंग्य से “कॉकरोच जनता पार्टी” नामक डिजिटल अभियान का जन्म हुआ।

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस आंदोलन को आगे बढ़ाया। उन्होंने इंडिया टुडे टीवी से बातचीत में कहा कि उन्हें सबसे अधिक दुख इस बात का हुआ कि ऐसी टिप्पणियाँ देश के मुख्य न्यायाधीश की ओर से आईं। दिपके ने कहा कि संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है और मुख्य न्यायाधीश का दायित्व उसी स्वतंत्रता की रक्षा करना है। उनके अनुसार, जब वही व्यक्ति लोगों की राय रखने पर उन्हें “कॉकरोच” कहे, तो यह युवाओं के लिए बेहद पीड़ादायक बन जाता है।

दिपके ने यह भी कहा कि यदि ऐसी टिप्पणी किसी सामान्य राजनेता की ओर से आती, तो शायद इतनी तीखी प्रतिक्रिया नहीं होती। उनके मुताबिक, सत्ताधारी दल के नेताओं द्वारा इस प्रकार की टिप्पणियाँ अक्सर की जाती रही हैं, लेकिन मुख्य न्यायाधीश का ऐसा बयान लोगों को अधिक चुभा क्योंकि उनसे संवैधानिक गरिमा और निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है।

हालाँकि बढ़ते विवाद के बाद CJI सूर्यकांत ने अपना स्पष्टीकरण भी जारी किया। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणियों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। उनके अनुसार, उन्होंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी जिन्होंने फर्जी और जाली डिग्रियों के माध्यम से वकालत और अन्य पेशों में प्रवेश किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग समाज में “परजीवी” की तरह घुसपैठ कर रहे हैं। CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य देश के युवाओं की आलोचना करना नहीं था।

लेकिन इस स्पष्टीकरण के बाद भी सोशल मीडिया पर उठा तूफ़ान शांत नहीं हुआ। इसके विपरीत, CJP का अभियान और तेज़ी से फैलने लगा। देखते ही देखते यह आंदोलन मीम्स, व्यंग्यात्मक वीडियो, वायरल रील्स और राजनीतिक कटाक्षों का केंद्र बन गया।

CJP ने खुद को “युवाओं का, युवाओं द्वारा और युवाओं के लिए बना राजनीतिक मंच” बताया। इस पेज ने बेरोज़गारी, प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक, राजनीतिक जवाबदेही की कमी, सरकारी संस्थाओं और Gen Z यानी नई पीढ़ी के बीच बढ़ती दूरी जैसे मुद्दों को उठाना शुरू किया। बड़ी संख्या में युवा यूज़र्स ने कहा कि उन्हें पहली बार कोई ऐसा मंच मिला है जो उनकी भाषा में उनकी समस्याओं को व्यक्त कर रहा है।

इस डिजिटल आंदोलन की रफ्तार इतनी तेज़ थी कि लॉन्च होने के सिर्फ़ 78 घंटों के भीतर ही इसके 30 लाख से अधिक फ़ॉलोअर्स हो गए। इसके बाद पाँच दिनों से कम समय में यह आँकड़ा 1 करोड़ पार कर गया। सोशल मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय राजनीतिक इतिहास में किसी भी नए संगठन या अभियान की इतनी तेज़ डिजिटल वृद्धि शायद ही कभी देखने को मिली हो।

CJP की लोकप्रियता केवल Instagram तक सीमित नहीं रही। X यानी पुराने Twitter पर भी इस अभियान को तेज़ समर्थन मिला। 21 मई तक X पर CJP के अकाउंट के 1.8 लाख से अधिक फ़ॉलोअर्स हो चुके थे। हालाँकि इस प्लेटफ़ॉर्म पर BJP अभी भी बहुत आगे है, जहाँ उसके लगभग 2.3 करोड़ फ़ॉलोअर्स हैं, जबकि कांग्रेस के लगभग 1.15 करोड़ फ़ॉलोअर्स हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में कई प्रसिद्ध हस्तियाँ और राजनेता भी शामिल होते दिखाई दिए। प्रसिद्ध YouTuber और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी ने इस आंदोलन का समर्थन किया। वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण भी इसके समर्थकों में शामिल बताए गए। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा और कीर्ति आज़ाद ने भी सोशल मीडिया पर मज़ाकिया अंदाज़ में CJP में शामिल होने की इच्छा जताई। सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और पूर्व सरकारी अधिकारी आशीष जोशी ने भी इस अभियान का समर्थन किया।

CJP ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में दावा तक कर दिया कि उसने TMC के सांसदों को अपने संगठन में “शामिल” कर लिया है। हालांकि संस्थापक अभिजीत दिपके लगातार यह स्पष्ट करते रहे कि CJP कोई पारंपरिक राजनीतिक पार्टी नहीं बनना चाहता। उनके अनुसार, यह आंदोलन मौजूदा राजनीतिक ढाँचों का विकल्प बनने की कोशिश कर रहा है, न कि उन्हीं का विस्तार।

दिपके ने साफ़ कहा कि यदि पारंपरिक राजनेता CJP में शामिल होने लगेंगे, तो Gen Z के कई समर्थकों को यह पसंद नहीं आएगा। उनका कहना था कि यह आंदोलन किसी भी पुराने राजनीतिक चेहरे को अपने मंच पर नहीं लाना चाहता क्योंकि युवा इसे पूरी तरह नई और स्वतंत्र राजनीतिक अभिव्यक्ति के रूप में देख रहे हैं।

CJP के बढ़ते प्रभाव के साथ इसके समर्थकों ने ऑनलाइन “राज्य इकाइयाँ” बनानी भी शुरू कर दीं। उदाहरण के तौर पर, एक यूज़र ने खुद को “CJP उत्तराखंड इकाई” का प्रतिनिधि बताते हुए वीडियो पोस्ट किया और संस्थापकों से आधिकारिक मान्यता की मांग की। इससे यह संकेत मिलने लगा कि यह केवल इंटरनेट ट्रेंड नहीं, बल्कि एक डिजिटल समुदाय का रूप लेता जा रहा है।

हालाँकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि सोशल Media फ़ॉलोअर्स और वास्तविक राजनीतिक सदस्यता में बहुत बड़ा अंतर होता है। ऑनलाइन लोकप्रियता ज़रूरी नहीं कि ज़मीनी राजनीतिक ताक़त में भी बदल जाए। भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में राजनीतिक प्रभाव केवल वायरल वीडियो और मीम्स से तय नहीं होता, बल्कि बूथ स्तर के संगठन, कैडर नेटवर्क और वास्तविक जनसंपर्क भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।

इसके बावजूद CJP का उभार इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय राजनीति में डिजिटल प्रभाव का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले राजनीतिक ताक़त वर्षों तक संगठन खड़ा करने, कार्यकर्ता नेटवर्क बनाने और जनसभाओं के माध्यम से विकसित होती थी, लेकिन अब मीम संस्कृति, एल्गोरिदम और वायरल कंटेंट भी उतने ही प्रभावशाली हथियार बन चुके हैं।

CJP ने अपनी सफलता का जश्न भी बेहद व्यंग्यात्मक तरीके से मनाया। BJP के फ़ॉलोअर्स को पीछे छोड़ने के बाद इस अकाउंट ने पोस्ट किया, “युवाओं की ताक़त को कम मत आँको।” इसके बाद एक और वायरल पोस्ट में लिखा गया, “दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी, ऐसा उन्होंने कहा था।” यह सीधा कटाक्ष BJP की उस पहचान पर था जिसमें वह खुद को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बताती रही है।

दरअसल, 1980 में स्थापित BJP आज भी सदस्यता के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी मानी जाती है। उसके दुनिया भर में 14 करोड़ से अधिक सदस्य बताए जाते हैं। लेकिन CJP के उभार ने यह दिखा दिया है कि डिजिटल दुनिया में लोकप्रियता के नियम अलग हैं। यहाँ दशकों की संगठनात्मक मेहनत से अधिक महत्व वायरल कंटेंट, व्यंग्य, हास्य और युवाओं की नाराज़गी को मिल रहा है।

अभिजीत दिपके का कहना है कि यह किसी सोची-समझी मार्केटिंग मुहिम का परिणाम नहीं है। उनके अनुसार, यदि यह केवल ट्रेंड होता तो वेबसाइट पर दो लाख से अधिक लोग रजिस्टर नहीं करते। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ट्रेंड सामान्यतः 24 से 48 घंटे में समाप्त हो जाते हैं, लेकिन CJP के साथ ऐसा नहीं हुआ क्योंकि इसके पीछे युवाओं का वास्तविक गुस्सा मौजूद है।

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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दिपके ने यह भी कहा कि भारत का Gen Z हमेशा से मौजूद था, लेकिन पहली बार उसे अपनी सामूहिक आवाज़ मिली है। उनके अनुसार, तीन दिनों में जिस तरह का समर्थन CJP को मिला, वह किसी संगठित प्रचार अभियान से संभव नहीं था। यह युवाओं के भीतर जमा असंतोष का विस्फोट था।

आज भारत की राजनीतिक बहस में “कॉकरोच” एक नए प्रतीक के रूप में उभर चुका है। यह आंदोलन रैलियों, पोस्टरों या चुनावी भाषणों से नहीं, बल्कि मीम्स, व्यंग्य, हास्य और सोशल मीडिया रील्स के माध्यम से आगे बढ़ रहा है। जो बात एक अदालत की टिप्पणी के विरोध में शुरू हुई थी, वह अब एक वायरल राजनीतिक घटना का रूप ले चुकी है।

“कॉकरोच जनता पार्टी” का उभार इस बात का संकेत है कि भारत की नई पीढ़ी पारंपरिक राजनीति से अलग एक नई डिजिटल राजनीतिक पहचान बना रही है। यह पहचान विकेंद्रीकृत ऑनलाइन समुदायों, मीम संस्कृति, वायरल नाराज़गी और राजनीतिक व्यंग्य से संचालित हो रही है। आने वाले समय में यह केवल एक इंटरनेट ट्रेंड साबित होगा या भारतीय राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत बनेगा, यह अभी कहना जल्दबाज़ी होगी। लेकिन इतना तय है कि CJP ने यह दिखा दिया है कि डिजिटल युग में राजनीतिक प्रभाव का समीकरण अब पूरी तरह बदल चुका है।