नई दिल्ली
उत्तराखंड के चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और बागेश्वर जिलों में शुक्रवार तड़के हुई मूसलाधार बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने बड़ी तबाही मचाई है। इन प्राकृतिक आपदाओं में कम से कम पाँच लोगों की मौत हुई और ग्यारह अन्य लापता बताए जा रहे हैं।
प्रमुख घटनाक्रम और प्रभावित क्षेत्र:
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बागेश्वर (पौसारी गाँव, कपकोट): पहाड़ी से मलबा गिरने से दो महिलाओं—बसंती देवी जोशी और बचुली देवी—की मौत हो गई। इनके पति रमेश चंद्र जोशी, गिरीश और पूरण जोशी लापता हैं। बसंती देवी का पुत्र पवन घायल हुआ है।
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चमोली (मोपाटा गाँव): भूस्खलन ने एक मकान और गोशाला को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे तारा सिंह और उनकी पत्नी कमला देवी की मौत हो गई, जबकि विक्रम सिंह और उनकी पत्नी घायल हुए और सुरक्षित बाहर निकाले गए। इस दौरान करीब 25 मवेशी भी लापता हुए।
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रुद्रप्रयाग (बसुकेदार, जखोली): तीन बादल फटने की घटनाओं ने कई गांवों को प्रभावित किया। सरिता देवी मकान ढहने से मलबे में दबकर मारी गईं। छेनागाड़ में आठ लोग, जिनमें चार की पहचान हो चुकी है, लापता हैं।
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टिहरी (बूढ़ा केदार क्षेत्र): पशुओं के शेड व मंदिर मलबे में दब गए, साथ ही गेंवाली में निजी संपत्ति—जैसे दो मंदिर, दो छानियां, एक गोशाला और फसल—को भारी क्षति हुई।
बचाव एवं राहत प्रयास:
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मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटों के लिए बागेश्वर, चमोली, देहरादून और रुद्रप्रयाग जिलों में रेड अलर्ट, और अन्य जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित जिलाधिकारियों को तत्काल राहत और सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
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एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, डी.डी.आर.एफ. और अन्य बचाव टीमें क्षतिग्रस्त मार्गों के बावजूद राहत कार्य में जुटी हैं। लगभग 200 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
सारांश:
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जिलों में हालात: चरम बारिश और बादल फटने से सतर्कता की स्थिति बनी हुई है, नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है, और मैदानी क्षेत्र से लेकर पहाड़ी पथ तक यातायात बाधित है।
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जान-माल का नुकसान: तीन से पाँच लोगों की मौत हो चुकी है, ग्यारह लोग लापता हैं, बुनियादी संरचना—गृह, पशुशालाएँ, मार्ग और फसलें—को भारी क्षति पहुंची है।
इस कड़ी मौसम आपदा में उत्तराखंड की प्रशासनिक मशीनरी और राहत एजेंसियाँ मानवीय जीवन की सुरक्षा और बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही हैं।