Chandrababu Naidu spends money on publicity but not for people: YSRCP spokesperson Putha Siva Sankar
ताडेपल्ली (आंध्र प्रदेश)
YSRCP के प्रवक्ता पुथा शिवा शंकर ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उनकी "पब्लिसिटी की सनक" चरम पर पहुंच गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रचार पर जनता का पैसा खर्च किया जा रहा है, जबकि किसान, बेरोजगार युवा, कर्मचारी और पत्रकार बिना किसी राहत के रह गए हैं। एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ताडेपल्ली में YSRCP के केंद्रीय कार्यालय में बोलते हुए, शिवा शंकर ने दावा किया कि I&PR (सूचना और जनसंपर्क विभाग) को पहले ही 330 करोड़ रुपये आवंटित किए जा चुके हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब आधिकारिक PR, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पहले से मौजूद हैं, तो सोशल-मीडिया इन्फ्लुएंसर सिस्टम की क्या ज़रूरत है। राज्य कैबिनेट ने सरकारी कार्यक्रमों के प्रचार के लिए सोशल-मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को शामिल करने के एक ढांचे को मंज़ूरी दी है।
उन्होंने दावा किया कि इन्फ्लुएंसर्स को हर महीने 1.5 लाख रुपये तक का भुगतान करना, जबकि वादा किया गया 3,000 रुपये का बेरोजगारी भत्ता अभी भी नहीं दिया गया है, TDP और ITDP से जुड़े अकाउंट्स को फायदा पहुंचाने के लिए है। उन्होंने कहा कि नकली फॉलोअर्स और बॉट्स आसानी से खरीदे जा सकते हैं और जनता के पैसे के कथित दुरुपयोग पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मीडिया ने भी इन्फ्लुएंसर फ्रॉड की खबरें दी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी अकाउंट्स को दबाया जा रहा है और नकली ID बनाई जा रही हैं, साथ ही पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के नाम पर पत्रकारों और निष्पक्ष आवाज़ों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने भारत में YSRCP के आधिकारिक सोशल-मीडिया अकाउंट्स पर लगी पाबंदियों पर भी सवाल उठाए और मेटा (Meta) की भूमिका पर जवाब मांगा।
उन्होंने सरकार को चुनौती दी कि वे इन्फ्लुएंसर्स से अमरावती में बाढ़, रायलसीमा में सूखा, 'सुपर सिक्स' वादों, महिलाओं के लिए 1,500 रुपये के वादे, फीस रिइंबर्समेंट, बकाया DA और IR, और उन मेडिकल कॉलेजों के बारे में बात करवाएं जिनके बारे में YSRCP का कहना है कि वे 80 प्रतिशत पूरे हो चुके थे लेकिन अब उन्हें निजीकरण की ओर ले जाया जा रहा है। उन्होंने पूछा, "क्या ग्राफिक्स और रील्स इन सच्चाइयों को छिपा सकते हैं?" उन्होंने कहा कि उत्तरी आंध्र में भारी बारिश और चक्रवात की स्थिति के कारण फसलें बर्बाद हो गई हैं, जबकि किसानों को कोई मदद नहीं मिल रही है। रिलीज़ के अनुसार, उन्होंने बैराज पर रील्स बनाने के लिए गृह मंत्री की आलोचना की, श्रीकाकुलम में विरोध कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए, और संकट के समय विदेश यात्रा करने के लिए चंद्रबाबू नायडू पर निशाना साधा, साथ ही हुदहुद के दौरान उनके प्रचार-प्रसार के तरीकों से इसकी तुलना भी की।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुफ्त फसल बीमा योजना को वापस ले लिया गया है, पत्रकारों के कल्याण और स्वास्थ्य सुविधाओं की अनदेखी की गई है, और किसानों, कर्मचारियों व बेरोजगारों के बजाय प्रचार-प्रसार पर सरकारी पैसे को प्राथमिकता दी गई है।