Centre's effective capital expenditure rises over five-fold to Rs 90.87 lakh crore during 2014-26: Govt
नई दिल्ली
वित्त मंत्रालय ने सोमवार को संसद को बताया कि 2014-26 के दौरान केंद्र का प्रभावी पूंजीगत व्यय (effective capital expenditure) बढ़कर 90.87 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो 2004-14 के दौरान दर्ज 17.04 लाख करोड़ रुपये से पांच गुना से भी अधिक है। वहीं, इसी अवधि में सरकार का प्रत्यक्ष पूंजीगत व्यय 12.39 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 64.70 लाख करोड़ रुपये हो गया। लोकसभा में एक तारांकित प्रश्न (starred question) के जवाब में पेश किए गए बयान में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2004-14 के दौरान केंद्र का पूंजीगत व्यय 12.39 लाख करोड़ रुपये था, जबकि 2014-26 के दौरान यह 64.70 लाख करोड़ रुपये रहा। उन्होंने यह भी कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यह आंकड़ा अनंतिम (provisional) है।
सरकार ने बताया कि "प्रभावी पूंजीगत व्यय का अर्थ है संपत्ति निर्माण के लिए केंद्र सरकार का खर्च। इसमें राज्य सरकारों को संपत्ति बनाने के लिए दी जाने वाली सहायता-अनुदान (grants-in-aid) भी शामिल हैं, जैसे कि समग्र शिक्षा के तहत स्कूल की इमारतें, पीएम आवास योजना के तहत घर आदि।" आसान शब्दों में, प्रभावी पूंजीगत व्यय में न केवल संपत्ति बनाने पर केंद्र का अपना खर्च शामिल है, बल्कि वह पैसा भी शामिल है जो वह राज्यों को विशेष रूप से सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और अन्य पूंजीगत संपत्तियों के निर्माण के लिए देता है।
बयान के अनुसार, प्रभावी पूंजीगत व्यय 2004-14 के दौरान 17.04 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2014-26 के दौरान 90.87 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें से 26.17 लाख करोड़ रुपये राज्यों को पूंजीगत संपत्ति बनाने के लिए दिए गए अनुदान थे, जबकि बाकी 64.70 लाख करोड़ रुपये केंद्र का अपना पूंजीगत व्यय था।
सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि जीडीपी (GDP) के हिस्से के रूप में पूंजीगत व्यय पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है। यह वित्त वर्ष 2014-15 में 1.6 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 में 3.2 प्रतिशत हो गया, और फिर वित्त वर्ष 2025-26 (अनंतिम) में मामूली रूप से घटकर 3.1 प्रतिशत हो गया। ज़्यादा कैपिटल खर्च के असर के बारे में बताते हुए बयान में कहा गया, "GDP के प्रतिशत के तौर पर कैपिटल खर्च बढ़ने से सड़कों, रेलवे, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी समेत इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में बढ़ोतरी हुई है।" इसमें यह भी कहा गया कि ज़्यादा सरकारी निवेश से "लॉजिस्टिक्स की क्षमता बेहतर हुई है, रोज़गार पैदा हुए हैं और प्राइवेट निवेश को बढ़ावा मिला है।" आसान शब्दों में कहें तो सरकार ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ने से कनेक्टिविटी बेहतर करने, नौकरियां पैदा करने और प्राइवेट कंपनियों को सरकारी प्रोजेक्ट्स के साथ निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने में मदद मिली है।
आगे की बात करें तो सरकार ने कहा कि वह बजट आवंटन, 'राज्यों को कैपिटल निवेश के लिए विशेष सहायता योजना' (SASCI) के तहत राज्यों को मदद, और प्लानिंग व इंफ्रास्ट्रक्चर डिलीवरी को बेहतर बनाने के लिए PM गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान, नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी और PM गतिशक्ति पब्लिक प्लेटफॉर्म जैसी पहलों के ज़रिए असरदार कैपिटल खर्च को प्राथमिकता देना जारी रखेगी।