आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने सोमवार को दावा किया कि केंद्र सरकार ने राज्य से धान पर मौजूदा बोनस नीति की समीक्षा करने और उसे बंद करने पर विचार करने के लिए कहा था। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से सवाल किया कि क्या वह इस सिलसिले में लिखे गए पत्र को सार्वजनिक करेंगी।
हालांकि, सीतारमण ने कहा कि स्टालिन का यह आरोप कि केंद्र सरकार ने तमिलनाडु को धान की खेती के लिए प्रोत्साहन राशि न देने का निर्देश दिया है “तथ्यात्मक रूप से बेबुनियाद, राजनीति से प्रेरित और राज्य के किसानों को गुमराह करने के लिए जानबूझकर किया गया झूठा दावा है।”
केंद्रीय वित्त मंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, नौ जनवरी 2026 के एक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि न केवल तमिलनाडु, बल्कि सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को सुझाव दिया गया था कि (फसल पर) राज्य की बोनस नीतियों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाया जाए।
पत्र में राज्यों से दलहन, तिलहन और बाजरा की खेती को बढ़ावा देने के लिए अपनी बोनस नीति को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप करने आग्रह किया गया था, जो पोषण सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और टिकाऊ कृषि के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से मेल खाए।
सीतारमण ने कहा, “यह पत्र राज्यों के लिए एक सलाह थी, निर्देश नहीं।”
उन्होंने स्टालिन के हालिया भाषण पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने राज्य सरकारों की ओर से दिए जाने वाले बोनस के सिलसिले में वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी एक पत्र का जिक्र किया था।