CBSE thwarts major cyberattack on revaluation portal; 3.8 million attack packets detected on June 3
नई दिल्ली
CBSE अधिकारियों ने ANI को बताया कि 3 जून को CBSE के री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) पोर्टल पर बड़े पैमाने पर साइबर हमला हुआ। इसमें लगभग 38 लाख (3.8 मिलियन) मैलिशियस पैकेट (हानिकारक डेटा पैकेट) का इस्तेमाल किया गया। ऐसा लगता है कि यह हमला चल रही वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश थी। अधिकारियों के अनुसार, 2 जून को चालू होने के कुछ ही मिनटों के भीतर पोर्टल ने 1 लाख से ज़्यादा अनधिकृत एक्सेस की कोशिशों का पता लगाया और उन्हें ब्लॉक कर दिया। साथ ही, सुरक्षा प्रणालियों ने DDoS (डिस्ट्रिब्यूटेड डिनायल-ऑफ-सर्विस) हमलों जैसे बड़े पैमाने पर अचानक आए ट्रैफिक के दबाव को सफलतापूर्वक संभाला।
CBSE के एक अधिकारी ने ANI को बताया, "ट्रैफिक प्रोफाइल में DDoS-टाइप हमले के पैटर्न जैसी समन्वित रिक्वेस्ट (अनुरोधों) में अचानक बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि, प्लेटफॉर्म पर लागू सुरक्षा ढांचे ने खतरे को सफलतापूर्वक रोका और सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित की।" अधिकारियों के अनुसार, 4 जून तक बोर्ड को रिजल्ट के बाद की शिकायत निवारण प्रक्रिया के माध्यम से 70,433 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें मार्क्स के वेरिफिकेशन के लिए 7,314 आवेदन और री-इवैल्यूएशन के लिए 63,119 आवेदन शामिल थे।
अधिकारियों ने बताया कि री-इवैल्यूएशन पोर्टल, जिसे मूल रूप से 1 जून को लाइव होना था, उसे 2 जून को लॉन्च किया गया। OSM (ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली) के कार्यान्वयन से संबंधित चिंताओं के बाद आपातकालीन सुरक्षा मजबूती अभ्यास (security hardening exercise) किया गया था। एक अधिकारी ने कहा, "एक्टिवेशन से पहले, सिस्टम का विशेष साइबर सुरक्षा सहायता के साथ पेनेट्रेशन टेस्टिंग, वल्नरेबिलिटी असेसमेंट और लोड टेस्टिंग किया गया। लॉन्च को इसलिए टाल दिया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी पहचानी गई कमियों (vulnerabilities) को दूर कर लिया गया है और प्लेटफॉर्म भारी ट्रैफिक का सामना कर सकता है।"
सुरक्षा सत्यापन पूरा होने के बाद 2 जून को सुबह लगभग 4:30 बजे पोर्टल को एक्टिवेट किया गया। अधिकारियों के अनुसार, लॉन्च के पहले दो मिनटों के भीतर ही लगभग 15 लाख (1.5 मिलियन) एक्सेस रिक्वेस्ट दर्ज की गईं, जबकि अनधिकृत एक्सेस की कोशिशों का रियल-टाइम में पता लगाकर उन्हें ब्लॉक किया गया। अधिकारियों ने बताया कि साइबर हमलों और भारी ट्रैफिक लोड के बावजूद प्लेटफॉर्म स्थिर रहा और एक ही समय में 8,000 से अधिक यूज़र्स को सपोर्ट करता रहा।
अधिकारियों ने आगे कहा कि अब तक छात्रों के डेटा से छेड़छाड़ की कोई पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि घटना के बाद सुरक्षा समीक्षा जारी है। OSM सिस्टम को लेकर विवाद तब बढ़ गया जब कई छात्रों ने आरोप लगाया कि रिजल्ट के बाद की प्रक्रिया के माध्यम से उपलब्ध कराई गई आंसर बुक की स्कैन की गई प्रतियों में पन्ने गायब थे, उत्तर बिना जांचे रह गए थे और विसंगतियां थीं। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने OSM प्रोजेक्ट के लागू होने और खरीद (procurement) से जुड़े पहलुओं की समीक्षा शुरू की। इसमें वेंडर का काम, कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें और क्वालिटी-कंट्रोल के तरीके शामिल थे।
इसी के साथ, सरकार ने प्रोजेक्ट की खरीद और उसे लागू करने से जुड़े पहलुओं की जांच के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरपर्सन एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र जांच के आदेश दिए। प्रशासनिक कार्रवाई के तहत राहुल सिंह और हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया, जबकि प्रशांत लोखंडे को नया CBSE चेयरमैन नियुक्त किया गया और वरुण भारद्वाज ने बोर्ड के नए सेक्रेटरी का पद संभाला।
अधिकारियों ने बताया कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास की मदद से टेक्निकल ऑडिट शुरू किए गए हैं। साथ ही, समीक्षा प्रक्रिया के दौरान स्कैनिंग और प्लेटफॉर्म से जुड़ी जो कमियां सामने आई थीं, उन्हें दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं।