आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश में जलमार्ग को सुगम और व्यवस्थित करने के लिए ‘उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान नियमावली-2026’ को मंत्रिमंडल ने मंगलवार को मंजूरी दे दी।
उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने यहां संवाददाताओं को मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि अब तक पानी के जहाज और नौका चलने की कोई नियमावली नहीं थी। मंत्रिमंडल से ‘‘उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान नियमावली-2026’’ प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब दो प्रकार की व्यवस्था होगी। इसके तहत डीजल से चलने वाली स्टीमर से लेकर बड़े जहाजों को यांत्रिक और नौका आदि के संचालकों को गैरयांत्रिक श्रेणी में रखा जाएगा।
मंत्री ने कहा कि अब तक बड़े जहाजों का ब्योरा था लेकिन गैर यांत्रिक श्रेणी के जलयानों की कोई सूची भी नहीं थी। उन्होंने बताया कि अब इनका पंजीकरण किया जाएगा और इसका पंजीयन शुल्क भी लिया जाएगा। नाविकों और यात्रियों के बीमा का भी प्रावधान नियमावली में किया गया है।
सिंह ने बताया कि यांत्रिक की 10 यात्री या पांच टन से अधिक भार, पांच से 10 यात्री और भार वाहन 0.5 टन तथा शून्य से लेकर तीन टन तक की अलग-अलग तीन श्रेणी बनाकर उसी हिसाब से पंजीयन शुल्क निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि गैर यांत्रिक जो परंपरागत नाविक से चलाते हैं, उसके लिए सिर्फ 50 रुपये पंजीयन शुल्क लिया जाएगा। मामूली शुल्क लेकर पंजीयन करने से एक डेटा भी तैयार हो जाएगा, अब तक गैर यांत्रिक में कही डाटा ही नहीं है।