स्तनपान से बच्चों को अतिसक्रियता के लक्षणों से बचाया जा सकता है : अध्ययन

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 29-06-2026
Breastfeeding may protect children from symptoms of hyperactivity: Study
Breastfeeding may protect children from symptoms of hyperactivity: Study

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
अगर मां बच्चे को छह महीने की उम्र तक स्तनपान कराए तो उसमें तीन से आठ साल की उम्र में उभरने वाले एकाग्रता में कमी एवं अतिसक्रियता संबंधी एडीएचडी विकार के लक्षणों को कम किया जा सकता है। यह दावा नार्वे में करीब 36 हजार परिवारों पर किये अध्ययन के आधार पर किया गया है।
 
अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर अथवा ध्यान अभाव एवं अतिसक्रियता (एडीएचडी) तंत्रिका से जुड़ी स्थिति है, जिसमें ध्यान न दे पाना और बेचैन व्यवहार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसके लक्षण आमतौर पर बचपन में ही रहते हैं, लेकिन कुछ मामलों में ये वयस्क होने तक भी बने रह सकते हैं।
 
अध्ययन के मुताबिक शिशुओं के लिए पोषण का मुख्य स्रोत, मां का दूध होता है और इसमें विकास और मस्तिष्क के विकसित होने वाले सहायक तत्व होते हैं जैसे लंबी प्रोटीन श्रृंखला वाले फैटी एसिड, अमीनो एसिड, एंटीबॉडी और फायदेमंद बैक्टीरिया।
 
नॉर्वे के बर्गन विश्वविद्यालय सहित कई केंद्रों के अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अध्ययन में यह समझने की कोशिश की कि स्तनपान बच्चे के दिमाग के विकास और प्रतिरोधक क्षमता पर को कैसे प्रभावित करता है।
 
‘बायोलॉजिकल साइकियाट्री’ नामक पत्रिका में प्रकाशित अनुसंधानपत्र के मुताबिक अध्ययन के दौरान इस बात का पता लगाने की कोशिश की गई कि शिशु को कितने महीनों तक केवल मां का दूध पिलाया गया और बच्चे में एडीएचडी के लक्षण विकसित होने के जोखिम से उसका क्या संबंध है।
 
बर्गन विश्वविद्यालय के बायोमेडिसिन विभाग में मनोवैज्ञानिक और अनुसंधानकर्ता और इस अनुसंधानपत्र की लेखिका डॉ. बेरिट स्क्रेटींग सोलबर्ग ने कहा, ‘‘हमने पाया कि बच्चे को जितने ज्यादा समय तक (छह महीने तक) सिर्फ मां का दूध पिलाया गया- तीन, पांच और आठ साल की उम्र में उनमें एडीएचडी के लक्षण उतने ही कम दिखे।’’
 
उन्होंने बताया कि इस अध्ययन में शामिल नार्वे के परिवारों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। प्रश्नावली के जरिए, अनुसंधानकर्ताओं ने यह पता लगाया कि हर बच्चे को कितने महीनों तक केवल मां का दूध पिलाया गया।
 
अनुसंधान पत्र के लेखकों ने लिखा, ‘‘हर महीने पूरी तरह से स्तनपान करने वाले बच्चों में एडीएचडी के लक्षण कम सामने आए, जिससे ज्ञात होता है कि पूरी तरह से स्तनपान कराने का संबंध एडीएचडी के निम्न लक्षणों से है।’