किताब विमोचन बना भ्रष्टाचार पर तीखी बहस का मंच

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 29-04-2026
Book launch becomes platform for heated debate on corruption
Book launch becomes platform for heated debate on corruption

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

तिरुवनंतपुरम में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम ने शासन में भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर चर्चा का रूप ले लिया। भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी बीजू प्रभाकर की किताब ‘नाम नम्मे कोल्लयादिक्कुमबोल’ के विमोचन के दौरान कई पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों ने खुलकर अपनी बात रखी और व्यवस्था की कमियों पर सवाल उठाए।

इस कार्यक्रम में पूर्व पुलिस महानिदेशक ए हेमचंद्रन ने पुस्तक का विमोचन किया और पहली प्रति पूर्व डीजीपी एस अनंतकृष्णन को सौंपी। यह किताब प्रभाकर के सेवाकाल के अनुभवों पर आधारित है, जिसमें उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों में कथित भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और अनियमितताओं का जिक्र किया है। लेखक का कहना है कि इसमें उन घटनाओं का उल्लेख है जिन्हें उन्होंने खुद देखा या जिनकी जानकारी उन्हें मिली। उन्होंने इसे “दिनदहाड़े लूट” जैसी स्थितियों का वास्तविक चित्रण बताया।

किताब में आंगनवाड़ी निर्माण से लेकर अदालतों के भवनों तक कई क्षेत्रों में अनियमितताओं पर प्रकाश डाला गया है। विमोचन के दौरान वक्ताओं ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया। ए हेमचंद्रन ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ असली बदलाव तभी आएगा जब आम लोग खुद इसके खिलाफ खड़े होंगे और जिम्मेदारी निभाएंगे।

एस अनंतकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटलीकरण बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक इससे न सिर्फ भ्रष्टाचार कम होगा, बल्कि फाइलों की जवाबदेही भी तय हो सकेगी।

आईएएस अधिकारी एन प्रशांत ने कहा कि अधिकारियों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर खुलकर बोलना चाहिए। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के इस्तेमाल को जरूरी बताया और सूचना के अधिकार कानून को सामाजिक बदलाव का मजबूत साधन माना।

मनोरमा बुक्स द्वारा प्रकाशित इस किताब के विमोचन में कई अन्य प्रमुख लोग भी मौजूद रहे। यह कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिक लॉन्च नहीं रहा, बल्कि शासन व्यवस्था पर सवाल उठाने और सुधार की जरूरत को रेखांकित करने का मंच बन गया।