आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
नयी दिल्ली में आयोजित ‘रिजिलिएंट फ्यूचर्स समिट’ में सागर अदाणी ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अहम बात कही। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकटों और युद्ध जैसी स्थितियों से निपटने के लिए मजबूत बुनियादी ढांचे का निर्माण बेहद जरूरी है।
सागर अदाणी ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में केवल तेज आर्थिक विकास ही काफी नहीं है। देशों को इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि वे अचानक आने वाले झटकों का सामना कितनी मजबूती से कर सकते हैं। उनके मुताबिक, किसी एक क्षेत्र में संघर्ष का असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर पड़ता है और ऊर्जा बाजार में बदलाव सीधे अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।
उन्होंने यह भी बताया कि ऊर्जा हर क्षेत्र की बुनियाद है। जल सुरक्षा के लिए ऊर्जा जरूरी है। खाद्य सुरक्षा भी उर्वरक, सिंचाई और लॉजिस्टिक्स के जरिए ऊर्जा पर निर्भर करती है। वहीं डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटिंग भी ऊर्जा के बिना संभव नहीं हैं।
भारत के 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगले 20 सालों में करीब 2000 गीगावॉट नई ऊर्जा क्षमता जोड़नी होगी। इसे एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव बताया गया है।
साथ ही उन्होंने कहा कि अदाणी समूह ऊर्जा परिवर्तन के लिए 100 अरब डॉलर निवेश करने की योजना पर काम कर रहा है। यह दुनिया में निजी क्षेत्र की बड़ी पहलों में से एक मानी जा रही है।
उन्होंने अंत में कहा कि बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, हवाई अड्डे और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में निवेश एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए समग्र ढांचे का विकास जरूरी है।