आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (आप) पर एक विवादित वीडियो से संबंधित निष्कर्षों को गलत साबित करने के लिए कथित तौर पर फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट हासिल करके अकाल तख्त के प्राधिकार को कमजोर करने की कोशिश का बुधवार को आरोप लगाया।
भाजपा ने मान और इस मामले में कथित रूप से शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की।
अकाल तख्त ने इस महीने की शुरुआत में एक वीडियो को लेकर मान को ‘‘गुरु दोखी’’ (गुरु-द्रोही) और ‘‘खालसा पंथ विरोधी’’ घोषित किया था। वीडियो में कथित तौर पर मान जैसा दिखने वाला एक व्यक्ति सिख गुरुओं और मारे गए आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक गतिविधियों में लिप्त दिखाई दे रहा है।
दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि ‘आप’ नेताओं ने पश्चाताप करने के बजाय सिखों की सर्वोच्च संस्था के निष्कर्षों को गलत ठहराने की कोशिश की।
सिरसा ने कहा, ‘‘उन्होंने जो पाप किया, उसके लिए पश्चाताप करने के बजाय उनके मंत्री हरपाल चीमा ने 18 जून को संवाददाता सम्मेलन करके कहा कि यह वीडियो फर्जी है।’’
उन्होंने दावा किया कि चीमा ने वीडियो के 1,191 ‘फ्रेम’ की जांच पर आधारित एक फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि यह वीडियो असली नहीं है।
सिरसा ने कहा कि अकाल तख्त के पांच सिंह साहिबान ने एक आदेश जारी कर निर्देश दिया था कि कोई भी सिख मान से किसी तरह का संबंध न रखे।
उन्होंने कहा, ‘‘अकाल तख्त साहिब ने 15 जून को भगवंत मान को गुरु-द्रोही और खालसा पंथ विरोधी घोषित किया, उन्हें सिख समुदाय से निष्कासित कर दिया और दुनियाभर के सिखों को आदेश दिया कि कोई भी सिख भगवंत मान से किसी तरह का संबंध न रखे।’’