गुवाहाटी
असम के संगीत प्रेमियों के लिए मंगलवार का दिन दुःख और संवेदना लेकर आया, जब प्रख्यात असमिया गायक और भारत रत्न भूपेन हजारिका के सबसे छोटे भाई समर हजारिका का निधन हो गया। 75 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ। परिवार के सूत्रों ने बताया कि वह कुछ समय से बीमार थे और हाल ही में उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी।
समर हजारिका का परिवार पत्नी, एक बेटा और एक बेटी से समृद्ध था। वह 10 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे और अपने पूरे जीवन में असम के सांस्कृतिक और संगीत क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने रेडियो, एल्बम और फिल्मों के लिए गीत गाए और संगीत रचा। इसके साथ ही उन्होंने अपने बड़े भाई भूपेन हजारिका की समृद्ध संगीत विरासत को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई। उनके गीतों में मानवता, प्रेम और सार्वभौमिक भाईचारे का संदेश झलकता था, जो असम के संगीत प्रेमियों और समग्र भारतीय संस्कृति के लिए प्रेरणास्रोत रहा।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने समर हजारिका के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “उनकी भावपूर्ण आवाज हर अवसर को रोशन करती थी और उन्होंने असम के सांस्कृतिक परिदृश्य में अमिट योगदान दिया। उन्होंने डॉ. भूपेन हजारिका की समृद्ध विरासत को भी आगे बढ़ाया और उनकी जन्म शताब्दी मनाने के प्रयासों में व्यापक सहयोग दिया।” उन्होंने कहा कि उनके निधन से असम ने एक और स्वर्णिम आवाज खो दी है और इस दुख की घड़ी में उनकी संवेदनाएँ और प्रार्थनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी समर हजारिका के निधन को अत्यंत दुखद बताया। उन्होंने कहा, “उरुका (माघ बिहू) के दिन प्रख्यात गायक के निधन की खबर ने हम सभी को स्तब्ध कर दिया। उनकी मधुर आवाज ने लोगों के दिलों और आत्माओं को छू लिया। असमिया संगीत में उनका योगदान अमर रहेगा और हमेशा याद किया जाएगा।”
समर हजारिका का जीवन और उनके गीत असम और पूरे देश के संगीत प्रेमियों के लिए प्रेरणा और विरासत के रूप में हमेशा जीवित रहेंगे। उन्होंने अपनी कला और समर्पण के माध्यम से असम के सांस्कृतिक परिदृश्य को समृद्ध किया और आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श प्रस्तुत किया। उनके निधन से संगीत जगत और असम के लोग एक अनमोल स्वर खो बैठे हैं।