जमानत नियम है, कारावास अपवाद, यहां तक ​​कि यूएपीए मामलों में भी : न्यायालय

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 18-05-2026
Bail is the rule, imprisonment the exception, even in UAPA cases: Court
Bail is the rule, imprisonment the exception, even in UAPA cases: Court

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
उच्चतम न्यायालय ने नार्को-आतंकवाद के एक मामले में मुकदमे का सामना कर रहे व्यक्ति को सोमवार को यह कहकर जमानत दे दी कि जमानत नियम है और जेल अपवाद, यहां तक कि यूएपीए मामले में भी यही नियम लागू होता है।
 
व्यक्ति पर जम्मू कश्मीर में मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद के वित्तपोषण में शामिल सीमा पार गिरोह के साथ संलिप्तता के आरोप हैं।
 
न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने हंदवाड़ा निवासी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को राहत प्रदान करते हुए उसे अपना पासपोर्ट जमा करने और हर 15 दिन में एक बार स्थानीय थाने में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया।
 
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं के तहत 2020 में दर्ज मामले की जांच कर रहा है।
 
शीर्ष अदालत ने कहा कि यूएपीए की धारा 43डी(5) अनिश्चितकालीन कारावास को उचित नहीं ठहरा सकती और इसे अनुच्छेद 21 और 22 के अधीन ही लागू होना चाहिए। यह धारा जमानत संबंधी सख्त प्रतिबंध निर्धारित करती है।
 
पीठ ने कहा, ‘‘जमानत नियम है और कारावास अपवाद है। यह अनुच्छेद 21 और 22 से निकला एक संवैधानिक सिद्धांत है और निर्दोष होने की धारणा कानून के शासन द्वारा शासित किसी भी सभ्य समाज की आधारशिला है।’’
 
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि के.ए. नजीब मामले में उसका फैसला बाध्यकारी कानून है और अधीनस्थ अदालतों, उच्च न्यायालयों या यहां तक ​​कि उच्चतम न्यायालय की अधीनस्थ पीठों द्वारा भी इसे कमजोर, दरकिनार या नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
 
के.ए. नजीब मामला यूएपीए के तहत जमानत के संबंध में 2021 में दिया गया उच्चतम न्यायालय का एक ऐतिहासिक फैसला है।
 
अंद्राबी ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि मोबाइल फोन रिकॉर्ड की जांच से पता चलता है कि अंद्राबी सीमा पार आतंकी संगठनों के संपर्क में था।
 
साल 2020 में दर्ज इस मामले की जांच एनआईए कर रही है। यह जांच गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत की जा रही है।