राम मंदिर मामले में लीपापोती की कोशिश, चंदे का विवरण सार्वजनिक किया जाए: कांग्रेस

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 07-07-2026
Attempt to cover up Ram Temple case, details of donations should be made public: Congress
Attempt to cover up Ram Temple case, details of donations should be made public: Congress

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
कांग्रेस ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले में मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लीपापोती के प्रयास का आरोप लगाया और कहा कि इस प्रकरण की उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने के साथ ही मंदिर के लिए प्राप्त चंदे का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि अयोध्या के भगवान राम के मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी करोड़ों देशवासियों की आस्था के साथ बड़ा विश्वासघात है और इस्तीफों तथा सीमित कार्रवाई के जरिए पूरे मामले में लीपापोती कर असली जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
 
उन्होंने मांग की कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ को तत्काल भंग कर शंकराचार्यों, धर्माचार्यों, संतों और अन्य धार्मिक प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए नया ट्रस्ट गठित किया जाए।
 
उनका यह भी कहना था कि उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम (एसआईटी) पर जनता का भरोसा नहीं है, इसलिए मामले की जांच उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र रूप से कराई जानी चाहिए।
 
रमेश ने कहा, ‘‘राम मंदिर के लिए नकद और वस्तु के रूप में प्राप्त सारे चंदे का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ें।’’
 
इस बीच, पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस पूरे मामले की जांच उच्चतम न्यायालय के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में कराई जानी चाहिए।
 
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राम मंदिर आंदोलन के कारण सत्ता में आने का अवसर मिला था, लेकिन अब लोगों में यह भावना बन रही है कि उनकी आस्था के साथ विश्वासघात हुआ है।
 
गहलोत ने आरोप लगाया कि कथित गड़बड़ियों की जानकारी काफी पहले से थी, लेकिन मामले को दबाने का प्रयास किया गया। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे प्रकरण में लीपापोती की कोशिश की गई, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं मंदिर निर्माण में विशेष रुचि दिखाई थी।