होर्मुज जलडमरूमध्य पर हमला ईरान की हमले की क्षमता को कमजोर करने के लिए : अमेरिकी सेना

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 13-07-2026
Attack on Strait of Hormuz to weaken Iran's strike capability: US military
Attack on Strait of Hormuz to weaken Iran's strike capability: US military

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कंटेनर पोत पर ईरानी हमले के बाद बढ़े तनाव के बीच अमेरिका ने रविवार से सोमवार को सुबह तक ईरान पर कई हवाई हमले किए। अमेरिकी सेना का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर किए गए इन हमलों का उद्देश्य ईरान की हमले की क्षमता को कमजोर करना है।
 
इस बीच ईरान ने हमलों के जवाब में बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और ओमान पर हमले किए। ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य के दूसरी ओर स्थित है और तेहरान उस पर समुद्री यातायात के प्रबंधन में सहयोग करने का दबाव बना रहा है।
 
ईरान के सरकारी मीडिया ने सोमवार तड़के ताजा हमलों की पुष्टि की, लेकिन कहा कि जलडमरूमध्य के आसपास के क्षेत्रों में किसी के हताहत होने या नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि किसी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया या नहीं।
 
रविवार सुबह अमेरिका की पहली कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कंटेनर पोत पर ईरान के हमले के जवाब में की गई। इसके बाद ईरान ने खाड़ी के अरब देशों पर हमले किए, जिससे क्षेत्र में हिंसा का नया दौर शुरू हो गया और युद्ध समाप्त करने के लिए तेहरान तथा वाशिंगटन के बीच चल रही वार्ता के विफल होने का खतरा बढ़ गया।
 
अमेरिका ने इसके बाद भी हमले किए। जलडमरूमध्य के निकट स्थित केश्म द्वीप के गवर्नर ने ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'इरना' को बताया कि सैन्य ठिकानों पर प्रक्षेपास्त्र दागे गए, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। बंदर अब्बास और उसके उत्तर में स्थित हाजीआबाद शहर में भी विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं।
 
अमेरिका के एक अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि कुछ हमलों में मिसाइल और वायु रक्षा प्रणालियों के साथ-साथ अर्द्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड की नौकाओं को निशाना बनाया गया।
 
ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से हुए अंतरिम समझौते की 60 दिन की अवधि लगभग आधी पूरी हो चुकी है। वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद वार्ता में बड़ी बाधा बन गए हैं।