आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केरल के देवस्वओम एवं स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार न्यायपालिका से टकराव नहीं चाहती, लेकिन विशेषकर मंदिरों के प्रशासन से जुड़े मामलों में उसे कामकाज के लिए अधिक स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
मुरलीधरन ने संवाददाताओं से बातचीत में मंदिरों के मामलों में न्यायपालिका के व्यापक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर दिए गए अपने हालिया बयान के संबंध में पूछे गए सवालों के जवाब में यह बात कही।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार अदालत से टकराव नहीं चाहती। लेकिन साथ ही सरकार के अधिकारों की भी रक्षा होनी चाहिए।’’
शबरिमला स्वर्ण चोरी मामले का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में कोई और कदम उठाने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि केरल उच्च न्यायालय ने इसकी जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप रखी है।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार फिलहाल शबरिमला स्वर्ण चोरी मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए कोई कदम नहीं उठा सकती। उच्च न्यायालय ने जांच एसआईटी को सौंपी है। अब तक आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया है। ऐसे में सरकार कुछ नहीं कर सकती।’’
मुरलीधरन ने कहा कि विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था और 'सोना किसने चुराया' जैसे सवाल चर्चा में थे।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि इस मामले को साबित करना है तो या तो एसआईटी आरोपपत्र दाखिल करे या अदालत उसे निश्चित समयसीमा के भीतर ऐसा करने का निर्देश दे। अब तक इनमें से कुछ भी नहीं हुआ है।’’
मंत्री ने कहा कि आरोपपत्र दाखिल करने में अत्यधिक देरी का लाभ अंततः आरोपियों को मिल सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब तक आरोपपत्र दाखिल होगा, तब तक आरोपियों के बच निकलने की संभावना काफी बढ़ जाएगी, क्योंकि सोना चोरी करने में माहिर लोग सबूत मिटाने में भी माहिर होते हैं। इसी विवशता के कारण मैंने कल वह टिप्पणी की थी।’’
मुरलीधरन ने कहा कि मामला केवल स्वर्ण चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड के प्रशासन से भी जुड़ा है।