भीषण गर्मी और सूखे के बीच राजौरी के कई जंगलों में लगी आग, वन विभाग अलर्ट पर

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 10-06-2026
Amidst scorching heat and drought, fires have broken out in several forests of Rajouri; the Forest Department is on alert.
Amidst scorching heat and drought, fires have broken out in several forests of Rajouri; the Forest Department is on alert.

 

राजौरी (जम्मू-कश्मीर):

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में भीषण गर्मी और लंबे समय से जारी शुष्क मौसम के बीच बुधवार को कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर जंगलों में आग लग गई। अधिकारियों के अनुसार, आग ने विभिन्न वन क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे वन संपदा और वन्यजीवों पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। आग बुझाने के लिए वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार राहत एवं नियंत्रण कार्य में जुटी हुई हैं।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, मौजूदा हीटवेव और लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण जंगलों में सूखी वनस्पति तेजी से आग पकड़ रही है। तेज गर्मी और शुष्क वातावरण के कारण आग कई स्थानों पर तेजी से फैलती चली गई। हालांकि अधिकारियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और आग पर काबू पाने के लिए विभिन्न एजेंसियों की मदद ली जा रही है।

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब एक सप्ताह पहले ही वन विभाग ने राजौरी जिले में लगातार बढ़ रही वनाग्नि की घटनाओं को लेकर चिंता जताई थी। 3 जून को राजौरी के कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (वेस्ट सर्किल) सतपाल ने बताया था कि पिछले 12 सप्ताह के दौरान जिले में लगभग 45 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें राजौरी और नौशेरा वन प्रभाग दोनों के मामले शामिल हैं।

उन्होंने बताया था कि राजौरी वन प्रभाग के कालाकोट तहसील स्थित सियालसुई खादर वन क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी और सूखे की वजह से जंगल का बड़ा हिस्सा आग की चपेट में आ चुका है। हालांकि हाल में हुई हल्की बारिश के कारण तापमान में कुछ कमी आई थी, जिससे उम्मीद जताई गई थी कि आग की घटनाओं में कमी आएगी, लेकिन बुधवार को फिर कई स्थानों पर आग लगने से चिंता बढ़ गई है।

सतपाल ने पहले कहा था कि वन विभाग ने विभिन्न एजेंसियों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित कर तेजी से संसाधन जुटाने और बेहतर संचार व्यवस्था विकसित करने की रणनीति बनाई है, ताकि आग को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सके। उनके अनुसार, वर्तमान में अधिकांश घटनाएं सतही आग (Surface Fire) की हैं, न कि पेड़ों की ऊपरी शाखाओं तक पहुंचने वाली क्राउन फायर (Crown Fire)। इसके बावजूद इनसे जंगल की जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंचता है।

उन्होंने चेतावनी दी थी कि ऐसी आग से केवल पेड़-पौधे ही नहीं, बल्कि पक्षी, जंगली जानवर, सरीसृप और अन्य वन्यजीव भी प्रभावित होते हैं। इसलिए जंगलों की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है।

वन विभाग ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि वे जंगलों के आसपास लापरवाही न बरतें, जलती हुई वस्तुएं या सिगरेट के टुकड़े न फेंकें और आग लगने की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।

फिलहाल वन विभाग, फॉरेस्ट प्रोटेक्शन फोर्स, सोशल फॉरेस्ट्री विभाग और स्थानीय स्वयंसेवकों की संयुक्त टीमें आग पर काबू पाने के लिए लगातार अभियान चला रही हैं। प्रशासन का प्रयास है कि आग को घने जंगलों तक फैलने से पहले ही नियंत्रित कर लिया जाए, ताकि पर्यावरण और वन्यजीवों को होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।