American workers received no economic benefit when ICE stepped up its crackdown.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लोगों से वादा किया था कि वे रोजगार और श्रम बाजार को बेहतर बनाएंगे। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने आव्रजन नीति और अमेरिकी इतिहास में सबसे बड़ा निर्वासन अभियान चलाने की योजना को अपने चुनाव प्रचार अभियान का मुख्य मुद्दा बनाया था।
अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने जुलाई 2025 में ‘एक्स’ पर लिखा था, ‘‘वाशिंगटन ने लंबे समय तक इस बात को नजरअंदाज किया कि बड़ी संख्या में अवैध आव्रजन से पारिश्रमिक दरें कम बनी रहीं, जिसका सबसे अधिक नुकसान कामकाजी वर्ग के अमेरिकियों, खासकर युवाओं को हुआ।’’
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में सीमा सुरक्षा मजबूत हुई है, कामकाजी/मजदूर वर्ग की आय बढ़ी है और व्यापारिक समझौतों के कारण बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है।
हालांकि, श्रम बाजार एक अलग तस्वीर पेश करता है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में बेरोजगारी बढ़ी, नयी भर्तियों की रफ्तार धीमी पड़ गई और वेतन वृद्धि ठहर गई। निर्माण क्षेत्र विशेष रूप से इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ।
हम श्रम बाजार, आव्रजन और सार्वजनिक पर्यावरण नीति के विद्वान हैं, जिन्होंने यह अध्ययन किया है कि इन आर्थिक प्रवृत्तियों को ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बड़े पैमाने पर चलाए गए निर्वासन अभियान से कैसे जोड़ा जा सकता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि जिन क्षेत्रों में आईसीई (आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन) की अधिक सख्त कार्रवाई हुई, वहां प्रवासी श्रमिकों के रोजगार में गिरावट देखी गई, लेकिन अमेरिकी नागरिकों के रोजगार या वेतन में न तो कोई वृद्धि हुई और न ही सुधार हुआ।