ओमान में संकटग्रस्त भारतीय महिला कामगारों से मिले राजदूत

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 20-07-2026
Ambassador meets distressed Indian women workers in Oman
Ambassador meets distressed Indian women workers in Oman

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
ओमान में भारत के राजदूत प्रशांत पिसे ने वहां घरेलू कामगार के रूप में कार्यरत भारतीय महिलाओं से मुलाकात की और उनकी शिकायतों के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को यह जानकारी दी।
 
दूतावास की यह पहल ऐसे समय में हुई है, जब ओमान और अन्य खाड़ी देशों में घरेलू कामगार के रूप में कार्यरत भारतीय महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, शोषण और वेतन नहीं दिए जाने की घटनाओं की लगातार खबरें सामने आती रही हैं।
 
दूतावास ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि पिसे ने दूतावास द्वारा संचालित आश्रय गृह में उन महिला घरेलू सहायिकाओं से मुलाकात की, जो संकट में हैं और ‘‘जिन्होंने अपने नियोक्ताओं के घर छोड़ दिए हैं या जिन्हें उनके नियोक्ताओं ने छोड़ दिया है’’।
 
दूतावास ने बताया कि वह संकटग्रस्त कामगारों को निःशुल्क आवास और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराता है। राजदूत के साथ बातचीत के दौरान उनकी शिकायतें और समस्याएं सुनी गईं।
 
दूतावास ने कहा, ‘‘उनकी शिकायतें और समस्याएं सुनी गईं तथा उन्हें आश्वासन दिया गया कि दूतावास की सामुदायिक मामलों की टीम उनके मुद्दों के शीघ्र समाधान के लिए तत्काल कार्रवाई करेगी।’’
 
यह मुलाकात हैदराबाद निवासी शबनम बेगम के मामले की पृष्ठभूमि में हुई। शबनम ने आरोप लगाया था कि उन्हें अधिक वेतन वाली घरेलू सहायिका के तौर पर नौकरी का झांसा देकर मस्कट ले जाया गया, लेकिन बिना वेतन दिए उनसे कई घरों में प्रतिदिन 12 से 15 घंटे तक काम कराया गया।
 
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई, पर्याप्त भोजन नहीं दिया गया और उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया। बाद में वह वहां से निकलकर भारतीय दूतावास के आश्रय गृह पहुंचने में सफल रहीं।
 
दूतावास ने शनिवार को कहा था कि उसने इस मामले का संज्ञान लिया है और उचित स्तर पर इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।
 
भारत के छह खाड़ी देशों --बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात-- के साथ श्रम एवं मानव संसाधन सहयोग संबंधी समझौते हैं। इन समझौतों के तहत नियमित द्विपक्षीय परामर्श के माध्यम से भारतीय कामगारों के कल्याण और संरक्षण से जुड़े मुद्दों के समाधान का प्रावधान है।