आरएसएस प्रमुख के बयान पर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन प्रमुख को ऐतराज, कहा–संविधान का अपमान

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 30-08-2025
All India Imam Association chief objects to RSS chief's statement, says it is an insult to the Constitution
All India Imam Association chief objects to RSS chief's statement, says it is an insult to the Constitution

 

नई दिल्ली

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा दिए गए "हिंदू राष्ट्र" संबंधी बयान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे देश में मौजूद अन्य सभी धर्मों के लिए अपमानजनक बताया।

मौलाना रशीदी ने शुक्रवार को एएनआई से बात करते हुए कहा,"यह देश कानून और संविधान से चलता है, गीता या कुरान से नहीं। मोहन भागवत बार-बार यह कह रहे हैं कि यह हिंदू राष्ट्र है और इससे कोई समझौता नहीं होगा — यह देश के सभी अन्य धर्मों का अपमान है।"

उन्होंने देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) की बात का भी विरोध करते हुए कहा कि मुस्लिम, सिख और बौद्ध समुदायों के व्यक्तिगत कानून समाप्त करना स्वीकार्य नहीं होगा।

"वह कभी-कभी कॉमन सिविल कोड की बात भी करते हैं। अगर इसका मकसद सिर्फ सभी के लिए कानून को समान बनाना है, तो वह पहले से ही है। लेकिन अगर इसका उद्देश्य मुसलमानों, सिखों और बौद्धों के निजी कानूनों को समाप्त करना है, तो हम इसे स्वीकार नहीं करते और इसकी निंदा करते हैं," मौलाना रशीदी ने कहा।

इससे पहले, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दिल्ली में संघ के तीन दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के अंतिम दिन 'अखंड भारत' और 'हिंदू राष्ट्र' को लेकर अपना दृष्टिकोण साझा किया।

उन्होंने कहा,"भारत एक अखंड राष्ट्र है, यह केवल एक राजनीतिक अवधारणा नहीं है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना की एक जीवंत सच्चाई है। हमारे पूर्वज, हमारी संस्कृति और मातृभूमि — यही तत्व हमें एक सूत्र में बाँधते हैं। जब यह भावना समाज में जागृत होगी, तब शांति और समृद्धि सुनिश्चित होगी।"

भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि 'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा का सत्ता या शासन से कोई संबंध नहीं है, बल्कि यह सबके लिए न्याय सुनिश्चित करने की भावना है।

"जब हम 'हिंदू राष्ट्र' की बात करते हैं तो कुछ सवाल उठते हैं। 'राष्ट्र' को हम 'नेशन' के रूप में अनुवाद करते हैं, जो एक पाश्चात्य अवधारणा है, जिसमें 'स्टेट' भी जोड़ दिया जाता है। हमारे लिए 'राष्ट्र' का अस्तित्व प्राचीन काल से रहा है, भले ही हम सदा स्वतंत्र नहीं रहे हों। 'हिंदू राष्ट्र' का सत्ता या शासन से कोई लेना-देना नहीं है... इसमें सभी के लिए बिना भेदभाव के न्याय सुनिश्चित होता है," भागवत ने कहा।