AI स्पेस टेक में 100-200 अरब डॉलर के निवेश अवसर की उम्मीद

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 29-08-2026
AI-driven space tech poised for investment boom, $100-200 bn opportunity worldwide: Report
AI-driven space tech poised for investment boom, $100-200 bn opportunity worldwide: Report

 

नई दिल्ली 
 
IEEE की एक रिपोर्ट के अनुसार, उम्मीद है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्पेस टेक्नोलॉजी में तेज़ी से विस्तार लाएगा। यह सेक्टर AI की तरह ही निवेश में भारी उछाल देख सकता है और दुनिया भर में अनुमानित $100-200 बिलियन का निवेश आकर्षित कर सकता है। रिपोर्ट में AI, एनर्जी, हेल्थ, स्पेस और फिजिकल AI को पांच प्रमुख टेक्नोलॉजी मेगाट्रेंड्स के तौर पर पहचाना गया है। इसमें कहा गया है कि AI को तेज़ी से अपनाने से टेक्नोलॉजी सेक्टर के बाहर भी विकास पर असर पड़ रहा है। यह रिपोर्ट IEEE फ्यूचर डायरेक्शन्स कमिटी के इंडस्ट्री एडवाइजरी बोर्ड ने IEEE सांता क्लारा वैली सेक्शन, IEEE कंप्यूटर सोसाइटी और IEEE इंडस्ट्री एंगेजमेंट के सहयोग से तैयार की है।
 
रिपोर्ट के मुताबिक, AI को तेज़ी से अपनाने से न सिर्फ AI से जुड़ी टेक्नोलॉजी में तेज़ी आई है, बल्कि इसने "स्पेस टेक्नोलॉजी को भी बढ़ावा दिया है"। माना जा रहा है कि स्पेस टेक्नोलॉजी में भी AI की तरह ही ज़बरदस्त विस्तार हो सकता है। इसमें ग्लोबल स्पेस-टेक निवेश का अनुमान $100-200 बिलियन लगाया गया है। रिपोर्ट में कमर्शियल निवेश, स्पेस तक सस्ती पहुँच, दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट, ऑटोनॉमस स्पेस व्हीकल और स्पेस-रिसोर्स के इस्तेमाल को इस सेक्टर के विकास में मददगार संकेत बताया गया है। इसमें स्पेस-बेस्ड सोलर या एनर्जी बीम और इंटरनेशनल स्पेस रेगुलेशन को फिर से शुरू करने जैसी चीज़ों को भी ऐसे विकास के तौर पर पहचाना गया है जो इस सेक्टर को नई दिशा दे सकते हैं।
 
IEEE का मेगाट्रेंड फ्रेमवर्क "हाई वॉल्यूम ऑर्बिटल इकोनॉमी" के उभरने की बात करता है, जिसमें ऑर्बिटल मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग, लूनर इकोनॉमी, कॉलोनाइज़ेशन, कमर्शियलाइज़ेशन और स्पेस रिसोर्स का इस्तेमाल जैसे क्षेत्र शामिल हैं। रिपोर्ट में इस विस्तार के लिए ज़रूरी टेक्नोलॉजी की भी सूची दी गई है, जिनमें नई सामग्री, साफ़ और ज़्यादा कुशल एनर्जी, मास ट्रांसपोर्टेशन के नए तरीके, स्पेस-टेक एग्रीकल्चर, नई सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, बेहतर प्रोपल्शन सिस्टम और कम रिसोर्स वाले प्रोडक्शन शामिल हैं।
 
रिपोर्ट का रिस्क-रिवॉर्ड असेसमेंट उन टेक्नोलॉजी पर भी ज़ोर देता है जो पारंपरिक सैटेलाइट एप्लीकेशन से परे स्पेस के आर्थिक दायरे को बढ़ा सकती हैं। इनमें एस्टेरॉयड माइनिंग और पृथ्वी के बाहर मैन्युफैक्चरिंग, स्पेस-बेस्ड सोलर पावर, स्पेस में डेटा सेंटर और सॉफ्टवेयर-डिफाइंड स्पेस सिस्टम शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि एस्टेरॉयड माइनिंग और पृथ्वी के बाहर मैन्युफैक्चरिंग से दुर्लभ सामग्री मिल सकती है और ग्लोबल सप्लाई चेन को नए सिरे से आकार दिया जा सकता है, जबकि स्पेस-बेस्ड सोलर पावर से लगातार साफ़ एनर्जी मिल सकती है।
 
हालाँकि, रिपोर्ट में रेगुलेटरी, सुरक्षा और सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी चुनौतियों की ओर भी इशारा किया गया है। बिखरे हुए पॉलिसी फ्रेमवर्क, भीड़-भाड़ वाली ऑर्बिट, स्पेस डेब्री (कचरा), स्पेक्ट्रम मैनेजमेंट की समस्याएँ, फंडिंग की कमी और इंजीनियरिंग व ऑपरेशनल स्किल्स की कमी इस सेक्टर के विकास को रोक सकती हैं। रिपोर्ट में अगले 5-10 सालों के लिए अंतरिक्ष से जुड़े भविष्य के परिदृश्य पर बात की गई है। इसमें कहा गया है कि अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी के विकास से खेती, रिन्यूएबल एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में नए बाज़ार, हाई-स्किल वाली नौकरियां और बिज़नेस के मौके पैदा हो सकते हैं।