नई दिल्ली
मैकिन्से की एक रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी 2030 तक US के आर्किटेक्चर, इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन (AEC) सेक्टर के लिए सालाना लगभग 228 बिलियन डॉलर की वैल्यू पैदा कर सकती हैं, जबकि अकेले यूरोप के कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर AI का असर लगभग 126 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि AEC दुनिया के सबसे बड़े उद्योगों में से एक है, जिसका ग्लोबल कंस्ट्रक्शन आउटपुट 2025 में लगभग 15 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है और 2040 तक इसकी मांग 22 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
हालांकि, इस सेक्टर में लेबर प्रोडक्टिविटी (मजदूरों की उत्पादकता) में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है; 2000 और 2022 के बीच इसमें केवल 10 प्रतिशत (यानी सालाना 0.4 प्रतिशत) की बढ़ोतरी हुई, जबकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 90 प्रतिशत (यानी सालाना 3 प्रतिशत) की बढ़ोतरी हुई।
रिपोर्ट में कहा गया है, "मौजूदा रफ्तार को देखते हुए, 2040 तक कंस्ट्रक्शन आउटपुट कुल मिलाकर मांग से 40 ट्रिलियन डॉलर तक कम हो सकता है।" रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो AI AEC इंडस्ट्री में काफी हद तक नॉन-फिजिकल (गैर-भौतिक) काम को ऑटोमेट कर सकता है। रिपोर्ट में बताया गया है, "AI में आर्किटेक्चर और इंजीनियरिंग सेक्टर में 50 प्रतिशत और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 39 प्रतिशत नॉन-फिजिकल काम को ऑटोमेट करने की क्षमता है।"
जैसे-जैसे AI एजेंट बिजनेस के कामों में शामिल होते जाएंगे, सबसे ज़्यादा वैल्यू और मुनाफा उन कंपनियों को मिलने की संभावना है जिनके पास खास प्रोजेक्ट डेटा, मुख्य फैसले लेने वाले वर्कफ़्लो और समय के बजाय नतीजों के आधार पर पैसे लेने की क्षमता होगी। इसके अलावा, मैकिन्से ने कहा कि AI से मिलने वाली वैल्यू का एक बड़ा हिस्सा उन कामों से आ सकता है जहां अभी समय, लागत और मार्जिन का नुकसान होता है; AI से तेज़ी से कार्यक्षमता बढ़ने की उम्मीद है। 2030 तक इनवॉइसिंग, डेटा एंट्री और इक्विपमेंट इंस्पेक्शन जैसी प्रक्रियाओं में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि AEC सेक्टर पर AI का असर तीन चरणों में विकसित होने की संभावना है। इसमें कहा गया है, "शुरुआती दौर में, लीडर नॉलेज वर्क और कोऑर्डिनेशन वर्कफ़्लो को बेहतर बनाने के लिए एजेंट का इस्तेमाल कर सकते हैं। मध्यम अवधि में, कंपनियां प्रोजेक्ट डेटा को दोबारा इस्तेमाल होने लायक इंस्टीट्यूशनल एसेट में बदलकर फायदा उठा सकती हैं।" लंबे समय में, उम्मीद है कि AI डिज़ाइन, प्लानिंग, लॉजिस्टिक्स, इक्विपमेंट और ऑन-साइट काम को एक ज़्यादा ऑटोमेटेड ऑपरेटिंग सिस्टम में मिला देगा।