मानसून सत्र से पहले कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी की मांग, नए दल-बदल विरोधी कानून पर हो चर्चा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 20-07-2026
Ahead of the Monsoon Session, Congress MP Manish Tewari demands a discussion on the new anti-defection law.
Ahead of the Monsoon Session, Congress MP Manish Tewari demands a discussion on the new anti-defection law.

 

नई दिल्ली

 संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) का नोटिस देकर नए दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून बड़े पैमाने पर हो रहे राजनीतिक दल-बदल को रोकने में पर्याप्त प्रभावी नहीं है और समय की मांग है कि ऐसा नया कानूनी ढांचा तैयार किया जाए, जो अवसरवाद से प्रेरित राजनीतिक दलबदल पर रोक लगाए, लेकिन लोकतांत्रिक असहमति की रक्षा भी करे।

लोकसभा महासचिव को भेजे अपने नोटिस में मनीष तिवारी ने सदन से अनुरोध किया कि सोमवार की कार्यवाही के दौरान प्रश्नकाल, शून्यकाल और सूचीबद्ध अन्य कार्यों को स्थगित कर इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा कराई जाए।

'अवसरवादी दल-बदल पर लगे रोक'

अपने प्रस्ताव में तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद और नीतिगत असहमति का सम्मान होना चाहिए, लेकिन केवल राजनीतिक लाभ या सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से होने वाले सामूहिक दल-बदल लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करते हैं।

उन्होंने नोटिस में कहा कि सदन ऐसे नए दल-बदल विरोधी कानून पर विचार करे, जो अवसरवाद से प्रेरित बड़े पैमाने के राजनीतिक दलबदल पर प्रतिबंध लगाए, जबकि संसद और राज्य विधानसभाओं के भीतर तथा बाहर ईमानदार और रचनात्मक असहमति के लिए पर्याप्त स्थान भी सुनिश्चित करे।

तिवारी ने सरकार से आग्रह किया कि इस विषय को राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा मानते हुए पूरे दिन की चर्चा कराई जाए।

लोकतांत्रिक असहमति की सुरक्षा पर जोर

कांग्रेस सांसद ने अपने प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया कि नया कानून केवल दलबदल रोकने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा संतुलन भी बनाए कि जनप्रतिनिधि अपनी पार्टी के भीतर या सदन में महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों पर स्वतंत्र और ईमानदार राय रख सकें।

उनका कहना है कि लोकतंत्र में विचारों की स्वतंत्रता और राजनीतिक जवाबदेही दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए किसी भी नए कानून में इन दोनों पहलुओं का संतुलन बनाए रखना आवश्यक होगा।

आज से शुरू हो रहा है मानसून सत्र

संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और यह 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक संसद में पेश करने जा रही है।

लोकसभा की कार्यसूची के अनुसार, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करेंगे। इस विधेयक का उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करना है। यह विधेयक सरकार द्वारा पहले जारी किए गए अध्यादेश का स्थान लेगा।

इसके अलावा सदन में शोक प्रस्ताव, प्रश्नकाल, विभिन्न मंत्रालयों के दस्तावेज सदन के पटल पर रखना, मंत्री वक्तव्य और नियम 377 के अंतर्गत विभिन्न जनहित के मुद्दों पर चर्चा भी होगी।

राज्यसभा में भी अहम विधेयक

उधर राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन संबंधी विधेयक पेश करेंगे। प्रस्तावित संशोधन के तहत राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के अपमान या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान किया गया है।

उच्च सदन में एनसीसी की केंद्रीय सलाहकार समिति के लिए सदस्य का चुनाव तथा संविधान संशोधन और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन से संबंधित संयुक्त समिति में नए सदस्यों की नियुक्ति के प्रस्ताव भी लाए जाएंगे।

सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष

मानसून सत्र के दौरान विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले पर राज्यसभा में चर्चा की मांग करते हुए नियम 267 के तहत नोटिस दिया है।

वहीं कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले पर चर्चा कराने के लिए कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है।

हंगामेदार रहने के आसार

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद का यह मानसून सत्र काफी हंगामेदार रह सकता है। एक ओर सरकार न्यायपालिका, राष्ट्रीय सम्मान और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष दलबदल, परीक्षा घोटाले, अयोध्या मामले और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है।

ऐसे में आगामी दिनों में संसद में तीखी बहस, राजनीतिक टकराव और महत्वपूर्ण विधायी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।