Action will be taken against KSRTC conductors who issue 'zero tickets' to male passengers: Kerala minister
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केरल के परिवहन मंत्री सी. पी. जॉन ने सोमवार को चेतावनी दी कि राज्य की ‘प्रियदर्शिनी नि:शुल्क बस यात्रा योजना’ के तहत महिलाओं के लिए निर्धारित 'जीरो टिकट' जानबूझकर पुरुष यात्रियों को जारी करने वाले केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) के परिचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि दोषी पाए जाने पर उन्हें निलंबित या सेवा से बर्खास्त भी किया जा सकता है।
मंत्री ने कहा कि ऐसी अनियमितताओं का पता लगाने के लिए सरकार ने जांच अभियान और सख्त कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारी किसी भी श्रमिक संगठन से जुड़ा हो, दोषी पाए जाने पर उसके प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।
जॉन ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "शुरुआत में कुछ परिचालकों ने दावा किया था कि पुरुष यात्रियों को जीरो टिकट गलती से जारी हो गए थे। अब हमने जांच और सख्त कर दी है। यदि कोई जानबूझकर ऐसा करता पाया गया तो उसके खिलाफ निलंबन या सेवा से बर्खास्तगी सहित कड़ी कार्रवाई की जाएगी।"
उन्होंने कहा कि पुरुष यात्रियों से किराया वसूलने के बावजूद उन्हें 'जीरो टिकट' जारी करना गंभीर अनियमितता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसा करने वाले परिचालक "जिस डाल पर बैठे हैं, उसी को काट रहे हैं," क्योंकि इस योजना के संचालन के लिए सरकार केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) भरपाई करती है।
मंत्री ने प्रियदर्शिनी योजना के तहत चलने वाली बसों के कर्मचारियों को निजी बस कर्मियों द्वारा कथित रूप से रोके जाने या उनके साथ मारपीट किए जाने की घटनाओं की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के हमले "कदापि स्वीकार्य नहीं हैं" और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रियदर्शिनी योजना की बसों के कर्मचारियों पर हमले में शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही उन्होंने ऐसी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश करने वालों को इससे बाज आने की चेतावनी दी।
निजी बस संचालकों द्वारा योजना को लेकर जताई गई चिंताओं को स्वीकार करते हुए जॉन ने कहा कि निजी बस क्षेत्र की समस्याओं का अध्ययन करने के लिए गठित पद्मकुमार समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार इस मुद्दे पर उचित निर्णय लेगी।
उन्होंने कहा कि समिति से ऐसी सिफारिशें किए जाने की उम्मीद है, जिनसे केएसआरटीसी के हितों को प्रभावित किए बिना निजी बस संचालकों की चिंताओं का समाधान किया जा सके।