Graphene's hidden quantum potential revealed, will revolutionize future electronics: Study
आवाज द वॉयस/ नई दिल्ली
'चमत्कारी पदार्थ' कहे जाने वाले ग्रेफीन को लेकर वैज्ञानिकों ने एक बेहद महत्वपूर्ण खोज की है, जो भविष्य की इलेक्ट्रॉनिक तकनीक को पूरी तरह बदल सकती है। जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ गोटिंगेन के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में पहली बार ग्रेफीन में फ्लोके प्रभाव (Floquet effects) को सीधे तौर पर देखा गया है। इस खोज ने लंबे समय से चल रही वैज्ञानिक बहस को समाप्त कर दिया है और यह सिद्ध कर दिया है कि प्रकाश की सूक्ष्म पल्स का उपयोग करके ग्रेफीन जैसे धात्विक या अर्ध-धात्विक क्वांटम पदार्थों की विशेषताओं को बदला जा सकता है।
ग्रेफीन एक अत्यंत पतला, एक एटम मोटी कार्बन परत है, जो अपनी मजबूती, स्थिरता और बिजली संचालन की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है। इसे पहले ही लचीली स्क्रीन, संवेदनशील सेंसर, बैटरी और उन्नत सोलर सेल जैसी तकनीकों में उपयोग के लिए ‘मिरेकल मैटेरियल’ माना जा रहा है। लेकिन नया अध्ययन बताता है कि ग्रेफीन की क्षमता इससे कहीं अधिक है।
शोधकर्ताओं ने फेम्टोसेकंड मोमेंटम माइक्रोस्कोपी तकनीक का उपयोग किया, जिसमें ग्रेफीन पर तेज़ रौशनी की सूक्ष्म बर्स्ट डालकर इलेक्ट्रॉनों के व्यवहार का निरीक्षण किया गया। इस प्रक्रिया ने स्पष्ट रूप से दिखाया कि ग्रेफीन के फोटोउत्सर्जन स्पेक्ट्रम में फ्लोके प्रभाव मौजूद हैं। अध्ययन के प्रमुख लेखक मार्को मर्बोल्ट के अनुसार, यह साबित करता है कि फ्लोके इंजीनियरिंग जैसी प्रकाश-आधारित तकनीक ग्रेफीन में भी प्रभावी है।
इस खोज का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इससे वैज्ञानिक अब लेज़र पल्स के माध्यम से क्वांटम पदार्थों की विशेषताओं को बेहद कम समय में अपनी आवश्यकता के अनुसार बदल सकते हैं। परियोजना प्रमुख प्रोफेसर मार्सेल रॉयटज़ेल के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में इलेक्ट्रॉनों को नियंत्रित करने के नए रास्ते खोलेगी, जिससे अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, उच्च संवेदनशील सेंसर और विश्वसनीय क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना आसान होगा।