बिहार में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के दौरान छात्रों की तबीयत बिगड़ी, स्वास्थ्य विभाग ने दी सफाई

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 26-02-2026
Students fell ill during the filariasis eradication campaign in Bihar, the health department clarified.
Students fell ill during the filariasis eradication campaign in Bihar, the health department clarified.

 

पटना:

बिहार के पटना जिले में लिंफैटिक फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के दौरान दवा सेवन के बाद कई स्कूली छात्रों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। यह घटना बुधवार को अथमलगोला प्रखंड के गणपत राय टोला स्थित एक प्राथमिक विद्यालय में सामने आई। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी बच्चे अब सुरक्षित हैं और किसी भी छात्र की हालत गंभीर नहीं है।

जानकारी के मुताबिक, स्कूल में मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान के तहत बच्चों को फाइलेरिया रोधी दवाएं दी जा रही थीं। दवा लेने के कुछ ही देर बाद कुछ छात्रों को चक्कर, मतली और घबराहट जैसी शिकायतें हुईं। स्कूल प्रशासन ने तुरंत इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी, जिसके बाद त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) और एंबुलेंस मौके पर भेजी गई।

अथमलगोला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि प्रभावित बच्चों को एहतियातन अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति सामान्य हो गई। उन्होंने कहा, “एमडीए कार्यक्रम कई दिनों से पूरे जिले में सुचारु रूप से चल रहा है। यह एक सामान्य दुष्प्रभाव की घटना है, घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।”

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, अभियान के तहत दी गई एल्बेंडाजोल दवा के हल्के दुष्प्रभाव कुछ बच्चों में दिखाई दे सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खाली पेट दवा लेने या शरीर की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सहयोग करें।

लिंफैटिक फाइलेरिया, जिसे आम बोलचाल में फाइलेरिया या हाथीपांव कहा जाता है, एक परजीवी संक्रमण है। यह धागे जैसे नेमाटोड कीड़ों के कारण होता है और संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। इस बीमारी से बचाव के लिए सरकार समय-समय पर सामूहिक दवा वितरण अभियान चलाती है, ताकि संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ा जा सके।

घटना के बाद जिला प्रशासन ने स्कूलों में दवा वितरण प्रक्रिया की निगरानी और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अभियान जारी रहेगा और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा, ताकि फाइलेरिया मुक्त बिहार के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।