आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
वॉशिंगटन डीसी से आई एक नई स्टडी ने गंभीर बीमारियों की समझ को नया आयाम दिया है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसे प्रोटीन की पहचान की है, जो न केवल न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों बल्कि कैंसर से भी जुड़ा हुआ है। यह खोज भविष्य में इलाज के नए रास्ते खोल सकती है।
यह शोध Houston Methodist Research Institute के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है। इसमें ‘TDP43’ नामक प्रोटीन पर फोकस किया गया है, जो पहले से ही ALS और डिमेंशिया जैसी बीमारियों से जुड़ा माना जाता रहा है। अब यह सामने आया है कि यही प्रोटीन डीएनए की मरम्मत की एक अहम प्रक्रिया को भी नियंत्रित करता है।
डीएनए मismatch repair वह प्रक्रिया है, जो कोशिकाओं में जीन कॉपी करते समय होने वाली गलतियों को ठीक करती है। यह शरीर के लिए बेहद जरूरी सुरक्षा तंत्र है। लेकिन इस अध्ययन में पाया गया कि जब TDP43 प्रोटीन का स्तर बहुत कम या बहुत ज्यादा हो जाता है, तो यह संतुलन बिगड़ जाता है। इससे डीएनए मरम्मत की प्रक्रिया जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती है, जो कोशिकाओं के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।
शोध में यह भी सामने आया कि इस असंतुलन का असर दिमाग की कोशिकाओं पर पड़ता है। इससे न्यूरॉन्स को नुकसान पहुंच सकता है, जो आगे चलकर ALS और फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया जैसी बीमारियों का कारण बनता है। यही नहीं, डीएनए की अस्थिरता बढ़ने से कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
वैज्ञानिकों ने बड़े कैंसर डाटाबेस का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि जिन ट्यूमर में TDP43 का स्तर ज्यादा था, उनमें म्यूटेशन की संख्या भी अधिक थी। यह संकेत देता है कि यह प्रोटीन कैंसर के विकास में भी अहम भूमिका निभा सकता है।