तिरुवनंतपुरम
मलयालम सिनेमा के महान अभिनेता ममूटी को रविवार को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से नवाज़े जाने पर उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि “देश द्वारा सम्मानित किया जाना किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होती है, इससे बढ़कर कुछ नहीं हो सकता।”
अपने चाहने वालों के बीच प्यार से ‘ममूक्का’ कहे जाने वाले 74 वर्षीय अभिनेता ने एक टीवी चैनल से बातचीत में इस सम्मान को “पूरी तरह अप्रत्याशित” बताया। उन्होंने कहा कि इस सम्मान से वे बेहद खुश हैं और यह उनके लिए गर्व का क्षण है।
पद्म भूषण की घोषणा के साथ ही सोशल मीडिया पर ममूटी को बधाइयों का तांता लग गया। फिल्म जगत की कई नामचीन हस्तियों ने उन्हें इस सम्मान के लिए शुभकामनाएं दीं। अभिनेत्री मंजू वारियर ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “बधाई हो ममूक्का! आपने हमें यह सिखाया है कि सीमाओं को कैसे तोड़ा जाता है और चुनौतियों को मुस्कान के साथ कैसे स्वीकार किया जाता है। आप हमारे लिए गर्व का विषय हैं और वाकई अद्वितीय हैं।”
अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर उन्हें बधाई देते हुए लिखा, “मेरे मित्र ममूटी अब पद्म भूषण ममूटी बन गए हैं। मेरे मित्र को हार्दिक शुभकामनाएं।”
इसके बाद केरल राज्य फिल्म पुरस्कार समारोह के दौरान मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और संस्कृति मंत्री साजी चेरियन ने भी ममूटी को मंच से बधाई दी। मुख्यमंत्री विजयन ने अपने संबोधन में कहा कि ममूटी को पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना पूरे केरल के लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने कहा, “केरल कैबिनेट इस खुशी के मौके का हिस्सा बनकर बेहद प्रसन्न है, क्योंकि हम पिछले कई वर्षों से उन्हें इस सम्मान के लिए अनुशंसित कर रहे थे। हर चीज़ का एक समय होता है। उन्हें हार्दिक बधाई। भारतीय सिनेमा के इतिहास में शायद ही कोई ऐसा कलाकार हो, जिसने इतने विविध और चुनौतीपूर्ण किरदार निभाए हों।”
मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि ममूटी ने हाल ही में केरल राज्य फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार नौवीं बार जीता है। साथ ही उन्होंने यह जानकारी भी साझा की कि ममूटी की फिल्म ‘ब्रमायुगम’ को लॉस एंजिलिस स्थित एकेडमी म्यूज़ियम ऑफ मोशन पिक्चर्स में प्रदर्शित की जाने वाली एकमात्र भारतीय फिल्म के रूप में चुना गया है, जो केरल और भारत—दोनों के लिए गर्व की बात है।
पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं, जिन्हें तीन श्रेणियों—पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री—में प्रदान किया जाता है।
पांच दशकों से अधिक के अपने फिल्मी करियर में ममूटी ने 400 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। उन्होंने मलयालम के अलावा तमिल, तेलुगु, कन्नड़, हिंदी और अंग्रेज़ी भाषाओं की फिल्मों में भी अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया है।
उनकी उपलब्धियों में तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, कई राज्य पुरस्कार, 14 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स, पद्म श्री, और दो मानद डॉक्टरेट उपाधियां शामिल हैं, जो उनकी अभिनय प्रतिभा और अपार लोकप्रियता का प्रमाण हैं।
ममूटी की चर्चित फिल्मों में ‘न्यू दिल्ली’, ‘ओरु वडक्कन वीरगाथा’, ‘ओरु सीबीआई डायरी कुरिप्पु’, ‘कुट्टी स्रांक’ और ‘भीष्म पर्वम’ जैसी यादगार फिल्में शामिल हैं। उन्होंने अदूर गोपालकृष्णन, के. जी. जॉर्ज और टी. वी. चंद्रन जैसे कला फिल्मों के प्रतिष्ठित निर्देशकों के साथ भी काम किया, वहीं आई. वी. ससी, जोशी, रणजीत और अनवर रशीद जैसे व्यावसायिक रूप से सफल निर्देशकों के साथ भी उनकी साझेदारी रही।
ममूटी ने वर्ष 1971 में फिल्म ‘अनुभवंगल पालिचकल’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। आज पद्म भूषण के साथ उनका नाम भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा कलाकारों की सूची में दर्ज हो गया है, जिनकी कला, मेहनत और समर्पण को देश ने सर्वोच्च स्तर पर सम्मान दिया है।




