आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने मंगलवार को कहा कि 21 जून को निर्धारित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की पुन:परीक्षा के लिए किए गए उच्च स्तरीय, गोपनीय और सैन्य स्तर के सुरक्षा इंतजाम तथा कृत्रिम मेधा आधारित चेहरा पहचान (फेस रिकग्निशन) व्यवस्था अभ्यर्थियों का तनाव और बढ़ा देगी।
नीट पुन:परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों पर लागू की जाने वाली कड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर चिंता जताते हुए अन्नामलाई ने कहा, ‘‘सरकार ने प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए भले ही कदम उठाए हों, लेकिन वह यह भूल गई है कि इससे छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव पड़ रहा है। ये वही छात्र हैं, जिन्होंने इस परीक्षा की तैयारी में महीनों लगाए हैं। ऐसी परिस्थितियां न केवल परीक्षा प्रणाली के मूल उद्देश्य को कमजोर करती हैं, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उस लक्ष्य के भी विपरीत हैं, जिसका उद्देश्य ‘परीक्षा संबंधी तनाव’ को कम करना है।’’
हाल ही में अपना नया राजनीतिक दल बनाने की घोषणा करने के बाद केंद्र सरकार के रुख की आलोचना करते हुए अन्नामलाई ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करके कहा, ‘‘दो-स्तरीय सीआरपीएफ व सीआईएसएफ सुरक्षा घेरा और भारतीय वायुसेना की मदद। एआई निगरानी के साथ चार-स्तरीय सीसीटीवी। प्रवेश से पहले बायोमेट्रिक और चेहरा पहचान। तलाशी के कई दौर। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा सीधी निगरानी के साथ बहु-स्तरीय निरीक्षण।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हां, आपने बिल्कुल सही पढ़ा। लेकिन ये किसी उच्च-स्तरीय, गोपनीय, सैन्य-ग्रेड सॉफ्टवेयर को खरीदने के इंतजाम नहीं हैं। ये इंतजाम शिक्षा मंत्रालय द्वारा 21 जून, 2026 को होने वाली नीट पुन:परीक्षा के लिए किए गए हैं।’’
उन्होंने कहा कि अतिरिक्त सुरक्षा उपायों और बेहतर निगरानी के जरिए पेपर लीक को रोकने के सरकार के प्रयासों की सराहना हर छात्र करेगा, लेकिन प्रवेश से पहले जांच का दायरा बढ़ाना, तलाशी की लंबी प्रक्रिया और परीक्षा के कुल समय को 180 मिनट से बढ़ाकर 195 मिनट किए जाने से अभ्यर्थियों पर परीक्षा का दबाव और अधिक बढ़ जाएगा।
अन्नामलाई ने यह भी कहा कि परीक्षा के लिए इन तमाम इंतजामों के बावजूद छात्रों को प्रवेशपत्र डाउनलोड करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, एनटीए ने छात्रों को आश्वासन दिया है कि वह जल्द से जल्द इसका समाधान करेगी।