नई दिल्ली
हिंदी और उर्दू साहित्य के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण अकादमिक पहल को बड़ी उपलब्धि मिली है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के शोध-पत्रों को अब एक विस्तृत पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया है। भारत सरकार के राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवर्धन परिषद (NCPUL) ने इस पुस्तक का प्रकाशन किया है।
यह संगोष्ठी 29 अप्रैल 2026 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रेमचंद आर्काइव्स एंड लिटरेरी सेंटर (JPALC) ने NCPUL के सहयोग से आयोजित की थी। इसका विषय 'प्रेमचंद का अदब: नए तनाज़ुर में' था। संगोष्ठी में देश के विभिन्न हिस्सों से आए साहित्यकारों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने प्रेमचंद के साहित्य के अलग-अलग पहलुओं पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए थे।
इस पुस्तक का संपादन जामिया के प्रेमचंद आर्काइव्स एंड लिटरेरी सेंटर के निदेशक प्रो. शहज़ाद अंजुम और राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवर्धन परिषद, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. शम्स इकबाल ने किया है।
कुलपति और कुलसचिव के सहयोग से मिली सफलता
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के अनुसार, राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन और शोध-पत्रों के पुस्तक के रूप में प्रकाशन की यह पूरी प्रक्रिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मजहर आसिफ और कुलसचिव प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी के मार्गदर्शन और सहयोग से पूरी हुई।
प्रेमचंद आर्काइव्स एंड लिटरेरी सेंटर के कर्मचारियों ने इस उपलब्धि पर कुलपति और कुलसचिव के प्रति आभार व्यक्त किया है। सेंटर ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के निरंतर प्रोत्साहन और सहयोग ने इस अकादमिक परियोजना को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रेमचंद के साहित्य पर नए शोध को मिली जगह
प्रकाशित पुस्तक में प्रेमचंद के उपन्यासों, कहानियों, निबंधों, पत्रों और अन्य साहित्यिक रचनाओं पर आधारित शोध आलेख शामिल हैं। इन लेखों में प्रेमचंद के साहित्य को नए दृष्टिकोण और समकालीन संदर्भों में समझने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक की खास बात यह है कि इसमें शामिल शोध-पत्र पहली बार प्रकाशित किए जा रहे हैं। इन्हें देश के विभिन्न शहरों के साहित्यकारों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। इससे प्रेमचंद के साहित्य पर हो रहे नए अकादमिक विमर्श को एक महत्वपूर्ण मंच मिला है।
देशभर के विद्वानों ने दिया योगदान
इस पुस्तक में अनवर पाशा, हबीबुल्लाह खान, कौसर मजहरी, शहज़ाद अंजुम, अबू बक्र एबाद, अर्शिया जबीन, अहमद इम्तियाज़, मोहम्मद मुश्ताक तेजरावी, खालिद मुबश्शिर, इरशाद नियाजी, सैयद मोहम्मद आमिर, जावेद हसन, साकिब इमरान, महजर रजा, शाहनवाज फैय्याज, जाहिद नदीम एहसान और सैयद फैसल हाशमी सहित कई विद्वानों के शोध-पत्र शामिल हैं।
इसके अलावा अलीगढ़ से सगीर अफराहीम और मोहम्मद अली जौहर, हैदराबाद से मोसर्रत जहां, अर्शिया जबीन और राहील सिद्दीकी, अहमदाबाद से मोहम्मद असलम, गया से सिम्मी इकबाल, जम्मू से जगमोहन सिंह तथा कोलकाता से दरख्शां ज़र्रैन और नीलोफर फिरदौस ने भी इस अकादमिक संकलन में योगदान दिया है।
इस पुस्तक का प्रकाशन जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रेमचंद आर्काइव्स एंड लिटरेरी सेंटर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे प्रेमचंद के साहित्य पर नए शोध और आलोचनात्मक अध्ययन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।